अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के तहत बने ईडब्ल्यूएस, एलआईजी के मकानों के अलावा गहलोत सरकार ने जयपुर में बड़ी संख्या में राजीव गांधी आवास योजना के तहत मकान बनाए थे। जवाहर नगर, कठपुतली नगर (22 गोदाम) समेत अन्य जगहों पर बड़ी संख्या में कच्ची बस्तियों के परिवारों को इन मकानों में शिफ्ट करना था। जेडीए ये काम नहीं कर पाया। इस कारण अब ये मकान भी खाली पड़े खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। इनके रख-रखाव पर भी सरकार को मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने अहम निर्णय लिया है। मल्टी स्टोरी ईडब्ल्यूएस
-एलआईजी फ्लैट्स 200-300 रुपये प्रति महीना के किराए पर दिए जाएंगे। इसकी तैयारी में अधिकारी लग गए हैं। इसके लिए गाइडलाइन तैयार करने के बाद आवेदन मांगे जाएंगे।
डीएलबी (डायरेक्टोरेट ऑफ लोकल बॉडी) डायरेक्टर ह्रदेश शर्मा ने बताया कि पिछले दिनों जयपुर जेडीए (जयपुर विकास प्राधिकरण) समेत प्रदेश की दूसरी शहरों की यूआईटी (नगर सुधार न्यास), विकास प्राधिकरण और निकायों ने एक प्रस्ताव बनाकर इन मकानों बेचने की गाइडलाइन बनाने के लिए सरकार से मांग की थी। इस पर उच्च स्तर पर काफी चर्चा के बाद इन मकानों को किराए पर देने का फैसला किया गया, ताकि मकानों का रखरखाव भी हो सके और उनका उपयोग भी हो सके।
इनको मिलेगा लाभ
मकान तीन लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों को किराए पर दिए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने ये प्रावधान भी रखा है कि अगर कोई किराएदार दस साल तक मकान में रहता है। उससे मकान का बकाया पैसा लेकर फ्लैट हमेशा के लिए दे दिया जाएगा। सरकार जिन मकानों को किराए पर दे रही हैं, वे वन और टू बीएचके हैं।
ईडब्ल्यूएस कैटेगिरी के फ्लैट्स वन बीएचके के हैं। इनका सुपर बिल्टअप एरिया करीब 380 वर्गफीट है। एलआईजी के टू-बीएचके फ्लैट्स का बिल्टअप एरिया करीब 500 से 550 वर्गफीट का है। डीएलबी डायरेक्टर ह्रदेश शर्मा ने बताया कि अभी निर्णय हुआ है। आवेदन कब से लिए जाएंगे, यह अभी तय नहीं है। इसके लिए पूरी नियमावली बनेगी, इसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगर तय संख्या से ज्यादा आवेदन आएंगे तो आवंटन लॉटरी के माध्यम से होगा।
शहर से दूरी होने के कारण नहीं मिले आवेदन
जयपुर, अलवर, पाली, अजमेर समेत प्रदेश के कई शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम और राजीव गांधी पुनर्वास योजना के तहत बनाए गए हजारों मकान खाली पड़े हैं। शहरी इलाके से बाहर बने होने के कारण इसे लेने में लोगों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। राजस्थान में जितने भी मकान खाली पड़े हैं, उसमें आधी संख्या से ज्यादा मकान गहलोत सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में बनवाए थे। तब सरकार ने गरीब तबके के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी लॉन्च करके आवास विकास संस्थान के जरिए प्रदेशभर में निजी बिल्डर्स से ये फ्लैट्स बनवाए थे। उस समय भी ये शहर सीमा से बहुत दूर थे, जिसके कारण इनमें आवेदन भी बहुत कम आए थे।