राजस्थान के झालावाड़ जिले में बीते दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। जिले में 24 घंटे में 117 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
राजस्थान के झालावाड़ जिले में बीते दो दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले के अधिकांश कस्बों और ग्रामीण इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बीते 24 घंटे में जिले में 117 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस मानसून सीजन में कुल 648 मिमी बारिश हो चुकी है।
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लगातार हो रही तेज बारिश के कारण जिले के सबसे बड़े कालीसिंध बांध के छह गेट खोलकर करीब 1 लाख क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। इसके साथ ही भीमसागर बांध के चार गेटों से 14,000 क्यूसेक, और छापी बांध के भी छह गेट खोले गए हैं। कालीखार, गुलैंडी और गागरिन सहित जिले के अन्य छोटे बांधों में भी पानी चादर की तरह बह रहा है।
मनोहरथाना कस्बा बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित है। परवन नदी के उफान पर आने से कस्बे की निचली बस्तियां जलमग्न हो गई हैं। प्रशासन ने मुनादी करवा कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। थानेश्वर महादेव मंदिर भी पानी में डूब गया है। खानपुर क्षेत्र में भी नांगली नदी में उफान के कारण पनवाड़ कस्बे में पानी भर गया है, जिससे दरा-अरनिया स्टेट हाईवे पर आवागमन बाधित हुआ है। वहीं दहीखेड़ा में उजाड़ नदी और पिपलिया गांव में आहू व रेवा नदी का पानी घुस गया है, जिससे झालावाड़-भवानीमंडी मार्ग कुछ देर के लिए बंद रहा।
बारिश के दौरान बकानी क्षेत्र के नसीराबाद गांव में एक कच्चे मकान की दीवार गिरने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। वहीं झालरापाटन के पास एक कार उफनती खाल को पार करते समय बह गई, हालांकि चारों सवारों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ हालात पर निगरानी बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू टीमों को सतर्क रखा गया है और पुल-पुलियाओं पर पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे उफनती नदियों या पुलियों को पार न करें और प्रशासन का सहयोग करें।