खेत और रास्ते सब हुए जलमग्न
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खेतों में पानी से चौपट हुई खरीफ की फसलें
जिले में लगातार हुई बारिश से बांध लबालब हो गए। वहीं, पड़ोसी जिलों से छोड़े गए पानी ने नदियों के जलस्तर को और बढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि किसानों की बाजरा, अरहर, ग्वार और मूंग जैसी खरीफ की फसलें खेतों में ही डूबकर नष्ट हो गईं। इससे किसान अब गिरदावरी की मांग करते हुए सरकार से मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।
गांवों में पानी से बिगड़े हालात
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र सैंपऊ उपखंड रहा, जहां चहलपुरा, बाला का नगला, रजौरा कला, हरनाथ का नगला, मोतीराम का नगला, ईंटकी, झीलरा, कोडपुरा, चंदू का नगला, राजा का नगला, ठाकुर दास का नगला, कैथरी, सहरोली, सैमरा और फूटे का नगला जैसे गांव बुरी तरह जलभराव की चपेट में आए। इन इलाकों में घरों के अंदर तक पानी घुस गया है, जिससे ग्रामीणों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।
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पुलिया की रपट पर चल रहा पानी
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मकानों के ढहने और रास्ते कटने से बढ़ी दिक्कतें
जलभराव के कारण कई कच्चे-पक्के मकान धराशायी हो गए हैं। कुछ गांवों में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि रास्ते तक पानी से कट गए। मोतीराम का नगला गांव में बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है। वहीं, बीमार और बुजुर्ग लोगों को चारपाई पर बैठाकर ले जाना पड़ रहा है।
पुलिस प्रशासन भी सतर्क
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