दौसा जिले के बांदीकुई थाना क्षेत्र के ऊनबड़ा गांव से 6 साल पहले लापता हुए 4 वर्षीय टिल्लू उर्फ प्रिंस के शव की तलाश 19 फरवरी से जारी है। कंकाल की खोज के लिए लगातार तीसरे दिन मंगलवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर खुदाई की जा रही है। खुदाई के कारण तीन लेन पर ट्रैफिक बंद कर दिया गया है।
80 मीटर तक हुई खुदाई, कंकाल नहीं मिला
सोमवार को जेसीबी और एक्सकेवेटर मशीनों की मदद से करीब 80 मीटर लंबाई, 4 मीटर चौड़ाई और लगभग 12 फुट गहराई तक खुदाई की गई। इसके बावजूद कंकाल नहीं मिला। इसके बाद मंगलवार को फिर से खुदाई शुरू की गई। जिस एक्सकेवेटर मशीन से खुदाई हो रही है, उसका किराया प्रति घंटा 10,500 रुपए है और एक घंटे में लगभग 20 लीटर डीजल खर्च हो रहा है।
पहले दिन हटाई गई थी सड़क की ऊपरी परत
रविवार को पहले दिन मिलिंग मशीन से सड़क की ऊपरी परत हटाई गई। इसके बाद ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) मशीन से जमीन की जांच कर संवेदनशील जगहों की पहचान की गई। आरोपियों द्वारा पीपल के पेड़ के सामने बताए गए स्थान को आधार मानकर जीपीआर तकनीक से 2-3 स्थानों को अति संवेदनशील क्षेत्र माना गया।
आगे भी जारी रहेगी खुदाई
मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार, थाना अधिकारी जहीर अब्बास, तहसीलदार राजेश सैनी सहित पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस का कहना है कि आगे भी वैज्ञानिक तरीके से खुदाई जारी रखी जाएगी। पूरी सावधानी और मेहनत के साथ काम किया जा रहा है, ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके। खुदाई के कारण दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की पांच लेन में से तीन लेन पर काम चल रहा है और दो लेन से ही वाहनों की आवाजाही हो रही है। सुरक्षा के लिए कुछ जगहों पर मिट्टी डालकर जमीन को समतल किया गया है और बैरिकेडिंग की गई है, ताकि कोई हादसा न हो।
परिजन और ग्रामीणों में मायूसी
परिजन और आसपास के ग्रामीण लगातार मौके पर मौजूद हैं। उन्हें उम्मीद है कि 6 साल पुराने मामले में बच्चे का शव मिल जाएगा। हालांकि अब तक कंकाल नहीं मिलने से परिवार में मायूसी है। पुलिस ने कहा है कि चिन्हित सभी जगहों की जांच पूरी होने तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। इससे पहले जयपुर से मंगाई गई स्वीडन निर्मित ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) मशीन से करीब पांच घंटे तक संदिग्ध क्षेत्र की जांच की गई। लगभग छह मीटर गहराई तक स्कैन कर दो स्थान चिन्हित किए गए, जहां निशान लगाए गए थे।
तकनीकी टीम ने मशीन की मदद से जमीन के अंदर संभावित गड्ढों, खाली जगहों या असामान्य गतिविधियों के संकेत तलाशे।