दौसा जिले के आभानेरी कस्बे में पर्यटक स्थल चांदबावड़ी के बाहर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश सामने आया है। कार्रवाई से प्रभावित लोग एसडीएम कार्यालय पहुंचे और प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
गरीबों पर कार्रवाई, प्रभावशाली लोगों को राहत का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में समानता नहीं बरती गई। आरोप लगाया गया कि गरीबों के मकान और दुकानें तोड़ दी गईं, जबकि कुछ प्रभावशाली लोगों के मकान और दुकानें छोड़ दी गईं। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने कोर्ट स्टे का हवाला देकर कुछ कब्जे नहीं हटाए, जबकि वास्तव में ऐसा कोई स्टे मौजूद नहीं है।
महिलाओं का दर्द और आत्मदाह की चेतावनी
धरने में शामिल महिलाओं ने बताया कि बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके मकान तोड़ दिए गए, जिससे उन्हें कड़ाके की ठंड में रात खुले में गुजारनी पड़ी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सभी के साथ समान व्यवहार नहीं किया गया तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगी और धरना जारी रखेंगी।
उप तहसीलदार के सामने जताया रोष
प्रदर्शनकारियों ने उप तहसीलदार अंगद राम के सामने भी नाराजगी जताई। उन्होंने मांग की कि जिन दुकानों को नहीं तोड़ा गया है, उनके कोर्ट स्टे की प्रतियां दिखाई जाएं। इस दौरान उप तहसीलदार वहां से चले गए, जिससे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया।
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एसडीएम रामसिंह राजावत ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि जिन दुकानों पर कोर्ट स्टे बताया जा रहा है, उनकी जांच करवाई जा रही है और जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, प्रदर्शनकारी तुरंत छोड़ी गई दुकानों और मकानों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे और मांग पूरी होने तक धरना जारी रखने की चेतावनी दी।
प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार
उप तहसीलदार अंगद राम ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की गई है और किसी तरह का पक्षपात नहीं किया गया। उनके अनुसार जिन लोगों के पास कोर्ट स्टे था, उनके मकान और दुकानें नहीं तोड़ी गईं।
धरना स्थल पर आभानेरी भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश सैनी भी पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनकी भी तीन दुकानें तोड़ी गई हैं और प्रशासन ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कांग्रेस नेताओं के कहने पर यह कार्रवाई की गई।