राजस्थान के दौसा जिले में आगामी पंचायत चुनावों के बीच पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया ने जिला स्पेशल टीम (DST) को भंग करते हुए उसमें तैनात सभी आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है। साथ ही टीम की कार्यप्रणाली की जांच के आदेश दिए गए हैं। इस कार्रवाई को चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था मजबूत करने और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
क्या है डीएसटी और क्यों भंग की गई टीम?
जिला स्पेशल टीम का गठन जिले में अपराध नियंत्रण और गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए किया जाता है। इसकी जिम्मेदारी हार्डकोर बदमाशों की धरपकड़, अवैध हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी तथा संगठित अपराध पर अंकुश लगाने की होती है। इस टीम से सामान्य थाना पुलिस से अलग विशेष सूचना तंत्र विकसित करने और महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कई महीनों से टीम के कामकाज को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि टीम अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रही थी और कुछ महत्वपूर्ण मामलों में कार्रवाई की गति धीमी थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एसपी कुंदन कंवरिया ने पूरी टीम को भंग करने का फैसला लिया। हालांकि, शिकायतों और आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पंचायत चुनाव से पहले पुलिस की सख्ती
राजस्थान में पंचायत चुनावों की प्रक्रिया के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए अहम चुनौती है। दौसा जिले में भी चुनावी गतिविधियों के दौरान शांति बनाए रखने, संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी रखने और किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने की जिम्मेदारी पुलिस पर है।
एसपी कुंदन कंवरिया ने पदभार संभालने के बाद से ही पुलिसकर्मियों को कानून-व्यवस्था के मामले में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। डीएसटी को भंग करने की कार्रवाई को इसी सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दबाव, अपराधियों से कथित सांठगांठ और ड्यूटी में लापरवाही जैसे मामलों पर पुलिस प्रशासन की नजर रहने की बात कही जा रही है।
थानाधिकारियों को भी कार्यप्रणाली सुधारने के निर्देश
कार्रवाई के बाद जिले के पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, थानाधिकारियों के साथ क्राइम मीटिंग में लंबित मामलों की समीक्षा कर त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। महिला उत्पीड़न, धोखाधड़ी, जालसाजी और जमीन विवाद से जुड़े मामलों में भी प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया गया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डीएसटी का नए सिरे से गठन किया जा सकता है। नई टीम में सक्रिय और कार्यकुशल पुलिसकर्मियों को शामिल करने की तैयारी की बात सामने आई है। संभावित रूप से साइबर अपराध, अवैध शराब और पंचायत चुनावों के दौरान होने वाली गड़बड़ियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आठ पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच
फिलहाल डीएसटी में तैनात सभी आठ पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी भूमिका और टीम की कार्यप्रणाली की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
एसपी की इस कार्रवाई को लेकर आमजन में भी चर्चा है। लोगों को उम्मीद है कि पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होने और अपराध नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने से कानून-व्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि, जांच पूरी होने और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही कार्रवाई के कारणों और आगे के कदमों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।