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राजस्थान न्यूज: दौसा में बच्चों की लगी खास क्लास, जज बोले- टॉफी नहीं, ट्रैप हो सकता है लालच

Wed, 02 Sep 2026 10:46 AM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

दौसा जिले में प्रदेश के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूस्डे’ के तहत 12 स्कूलों में 2000 से अधिक बच्चों को सुरक्षा और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई। 12 न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को अपहरण, शोषण, बाल श्रम, भीख मंगवाने, तस्करी और साइबर अपराध से बचने के तरीके बताए।
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दौसा के बच्चों को जानकारी देते जज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दौसा जिले के स्कूलों में मंगलवार को बच्चों की क्लास कुछ अलग रही। यहां बच्चों को अंग्रेजी, गणित या विज्ञान की जगह ऐसे सबक दिए गए, जो मुश्किल वक्त में उनकी जिंदगी बचा सकते हैं। प्रदेश के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूस्डे’ के तहत जिले के 12 स्कूलों में एक साथ 12 न्यायिक अधिकारी पहुंचे और 2000 से अधिक बच्चों को अपहरण, शोषण, बाल तस्करी, साइबर अपराध और अनजान लोगों से होने वाले खतरे से बचने के तरीके बताए। बच्चों को समझाया गया कि टॉफी, चॉकलेट या फ्री गिफ्ट का लालच कई बार किसी बड़े खतरे का जाल हो सकता है।

जज ने समझाया- टॉफी नहीं, ट्रैप है

मुख्य कार्यक्रम पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, सिविल लाइन्स, हरिपुरा रोड में आयोजित हुआ। जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष केशव कौशिक ने बच्चों से बातचीत करते हुए उन्हें संभावित खतरों को पहचानने और तुरंत प्रतिक्रिया देने के तरीके बताए। उन्होंने बच्चों से कहा कि यदि कोई अनजान व्यक्ति यह कहे कि ‘मैं तुम्हारे पापा का दोस्त हूं’, ‘मम्मी ने बुलाया है’ या ‘चलो, तुम्हें चॉकलेट और पैसे दूंगा’, तो सावधान हो जाएं। ऐसी स्थिति में मिलने वाला लालच टॉफी नहीं, बल्कि ट्रैप हो सकता है।

बच्चों को बताए बचाव के तीन ब्रह्मास्त्र- NO, GO, TELL

जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने बच्चों को खतरे से बचने के लिए तीन आसान मंत्र बताए- NO, GO, TELL। इसका मतलब है- मना करो, वहां से भागो और तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताओ। बच्चों को समझाया गया कि किसी अनजान व्यक्ति के लालच में नहीं आना है और यदि कोई उन्हें असहज या संदिग्ध तरीके से अपने साथ ले जाने की कोशिश करे तो तुरंत वहां से निकलकर किसी विश्वसनीय व्यक्ति को पूरी बात बतानी चाहिए।

खतरा सिर्फ गली में नहीं, मोबाइल में भी

केशव कौशिक ने बच्चों को यह भी चेताया कि आज खतरा केवल गली, सड़क या आसपास तक सीमित नहीं है, बल्कि मोबाइल और इंटरनेट के जरिए भी बच्चों तक पहुंच सकता है। उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग, इंस्टाग्राम और मैसेजिंग एप पर अनजान लोगों से होने वाली दोस्ती को लेकर सावधान किया। बच्चों को बताया गया कि ऑनलाइन पहचान हमेशा असली नहीं होती। इसलिए किसी अनजान ऑनलाइन दोस्त से अकेले मिलने कभी नहीं जाना चाहिए। बच्चों को बाल श्रम, भीख मंगवाने और मानव तस्करी जैसे अपराधों से भी सतर्क रहने की जानकारी दी गई।

हर बच्चे को याद होने चाहिए ये हेल्पलाइन नंबर

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को जरूरी हेल्पलाइन नंबर भी याद करवाए गए। उन्हें बताया गया कि किसी मुश्किल या खतरे की स्थिति में मदद लेने के लिए इन नंबरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • 1098 - चाइल्ड हेल्पलाइन
  • 112/100 - पुलिस
  • 181 - महिला हेल्पलाइन
  • 1930 - साइबर ठगी की शिकायत
  • 15100 - निःशुल्क कानूनी सहायता

बच्चों को यह भी बताया गया कि स्कूल में लगी ‘कोर्ट वाली दीदी’ शिकायत पेटी के जरिए वे अपनी समस्या गुप्त रूप से पर्ची में लिखकर दे सकते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क कानूनी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

12 स्कूलों में एक साथ लगी ‘न्याय की क्लास’

‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूस्डे’ कार्यक्रम के तहत दौसा के 12 स्कूलों में एक साथ न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों को जागरूक किया। आदर्श विद्या मंदिर में न्यायाधीश प्रेम राजेश, छतरी वाली ढाणी में पॉक्सो जज रेखा राठौड़, वैभव संस्था में सचिव संतोष अग्रवाल, गांधी चौक में शुभ्रा शर्मा और रोज पब्लिक स्कूल में माधवी गोस्वामी सहित न्यायिक अधिकारियों ने अलग-अलग स्कूलों में बच्चों से संवाद किया। इस दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और किसी भी तरह के खतरे की स्थिति में मदद लेने के तरीकों की जानकारी दी गई।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम में प्राचार्य लेखराम सहित सैकड़ों विद्यार्थी मौजूद रहे। न्यायिक अधिकारियों ने बच्चों से कहा कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, लालच या ऑनलाइन संपर्क को हल्के में न लें। खतरा महसूस होने पर तुरंत ‘NO, GO, TELL’ के मंत्र को याद करें और भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लें। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल कानूनी जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे व्यावहारिक तरीके सिखाना था, जिनका इस्तेमाल वे किसी संभावित खतरे की स्थिति में तुरंत कर सकें।

 

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