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Dausa: अस्पतालों में बढ़ी रोगी बच्चों की संख्या, 350 की ओपीडी में 90 फीसदी उल्टी-दस्त व बुखार के मरीज

Mon, 26 Jan 2026 09:38 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

Dausa: ठंड और गिरते तापमान के कारण बच्चों में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। दौसा जिला अस्पताल के एमसीएच सेंटर में रोजाना सैकड़ों की संख्या में बच्चे आ रहे हैं जो चेस्ट इंफेक्शन, जुकाम-खांसी, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार से परेशान हैं।
 
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दौसा जिला अस्पताल में लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले में लगातार गिरते तापमान और ठिठुरन के कारण मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हैं। दौसा जिला अस्पताल के एमसीएच सेंटर में रोजाना लगभग 350 बच्चों की ओपीडी में से 90 प्रतिशत मरीज सर्दी-ज़ुकाम और उससे जुड़ी बीमारियों के हैं।

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अधिकांश रोगी नवजात से लेकर 12 वर्ष तक के
इन बच्चों में गले और चेस्ट इंफेक्शन, जुकाम-खांसी, उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार के मरीज अधिक हैं। अधिकांश रोगी नवजात से लेकर 12 वर्ष तक के हैं। हालांकि कुछ बच्चों में निमोनिया के मामले भी देखे जा रहे हैं। जुकाम के बाद खांसी से बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है, जो 10 से 20 दिन तक बनी रहती है। जिला अस्पताल एमसीएच सेंटर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत पाराशर ने बताया कि पिछले कई दिनों से तेज सर्दी ने बच्चों को काफी प्रभावित किया है। बच्चों में सर्दी से इंफेक्शन और सांस लेने में दिक्कत वाले मरीज बढ़ रहे हैं।

हीटर का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा नुकसान 
डॉ. धीरज बैंसला ने बताया कि सुबह और शाम के समय तेज ठंड रहती है, इस दौरान बच्चों को बाहर नहीं निकालना चाहिए। इसके साथ ही हीटर का अधिक उपयोग भी नुकसानदेह है। ज्यादा हीटर चलाने से बच्चों की त्वचा शुष्क हो रही है और चर्म रोग बढ़ रहे हैं। साथ ही हीटर में बच्चों को अधिक देर तक रखने से ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है।
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निमोनिया के मामले आ रहे सामने
बच्चों को बाजार के पैक्ड फूड से भी बचाना चाहिए। सर्दियों में बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मौसमी फल खिलाना लाभकारी है। शिशु रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना आने वाले बच्चों में 15 से 20 प्रतिशत बच्चे इंफेक्शन से पीड़ित पाए जा रहे हैं। राजकीय सामुदायिक अस्पताल की प्रभारी डॉ. अंजना भार्गव ने बताया कि इन दिनों खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें से रोजाना एक से दो बच्चों को निमोनिया के कारण भर्ती करना पड़ रहा है। यह समस्या विशेष रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित कर रही है।

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