दौसा जिले सहित प्रदेश के कई इलाकों में किसान पशुओं को हरे चारे के लिए कई तरह के हरे चारा उगाते हैं, लेकिन नेपियर घास एक ऐसी प्रजाति की घास है, जिसको एक बार इसकी कटिंग लगाने के बाद कई वर्षों तक पशुओं को पौष्टिक हरा चारा आसानी से मिलता रहता है। इससे किसान की पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था बड़े आराम से हो जाती है। साथ ही ये घास पशुओं के लिए भी बहुत उपयोगी बताई गई है।
दौसा कृषि अधिकारी (प्रशिक्षण) अशोक कुमार मीणा ने बालाजी क्षेत्र के के गांव सुरैर में किसान हजारी लाल मीणा द्वारा कृषि विभाग द्वारा देय अनुदान की सहायता से उगाई गई नेपियर घास का निरीक्षण किया। इसके बाद मीणा ने बताया कि गत वर्ष विभाग द्वारा अनुदान पर नेपियर घास लगवाई गई थी, जिस पर विभाग ने 10 हजार रुपये का अनुदान दिया था। वर्तमान में इनके इन्होंने लगभग दो बीघा जमीन में नेपियर घास उगा रखी है। इससे प्रतिदिन पशुओं के लिए हरा पौष्टिक चारा मिल रहा है।
पशुओं के दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी
इस घास को खाने के बाद पशुओं के दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है एवं एक बार लगाने के बाद आसानी से कई वर्षों तक लगातार हरा चारा मिलता रहता है। इसकी एक बार कटाई के बाद पुनः फुटान होती रहती है। इसकी कटिंग लगाकर किसान नेपियर घास पैदा कर सकते हैं।
किसानों को मिलती है सब्सिडी
किसान हजारीलाल मीणा ने बताया कि यदि कोई भी किसान नेपियर घास लगाना चाहते हैं तो खरीदकर अपने खेत में लगा सकते हैं। नेपियर घास के उगने पर सब्सिडी भी मिलती है। किसान हजारीलाल मीणा आस-पास के किसानों को नेपियर घास के बारे में जागरूक कर रहे हैं। किसान हजारी लाल मीना प्रगतिशील किसान हैं। वे नवीनतम कृषि तकनीकियों को अपनाते रहते हैं। इनके द्वारा अभी 02 बीघा भूमि में जाल पर लौकी लगा रखी है एवं अन्य सब्जियां मेड पर मल्चिंग व ड्रिप के माध्यम से भी लगा रखी है। इनको देखकर क्षेत्र के अन्य किसान प्रेरित होते हैं।