दौसा जिले के आर्यन को बोरवेल में गिरे लगभग 30 घंटे का समय हो चुका है। अभी तक आर्यन बोरवेल से बाहर नहीं आ पाया है। देसी और टेक्नीशियन दोनों जुगाड़ के माध्यम से आर्यन को बचाने के प्रयास किए गए, जो कामयाब नहीं रहे। अब सवाई माधोपुर से एक मशीन को बुलाया गया है, जो एक सुरंग बनाकर आर्यन को बाहर लाने का काम करेगी। इसके चलते उम्मीद है कि तीन से चार घंटे में आर्यन बोरवेल से बाहर आ सकता है।
घटना के बाद से ही मौके पर दौसा जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार और दौसा जिला पुलिस अधीक्षक रंजीत शर्मा बने हुए हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ प्रयासरत है कि जल्द से जल्द आर्यन बोरवेल से बाहर आए, लेकिन अभी तक कोई खास सफलता एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को नहीं मिल पाई है।
जगमोहन मीणा पहुंचे घटनास्थल पर
घटना के बाद से ही घटनास्थल पर नेताओं का भी जमघट लगा हुआ है। डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा यहां पहुंचे थे। उस दौरान ही उन्होंने बड़ी मशीनें मंगाए जाने की बात कही थी। इसके बाद सवाई माधोपुर से एक मशीन आ गई है। अब उम्मीद है कि बच्चे को सही सलामत बाहर निकाल लिया जाएगा।
ये है मामला
बता दें कि दौसा के कालीखाड गांव में सोमवार दोपहर ये दर्दनाक हादसा हुआ था। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे आर्यन नाम का एक बच्चा बोरवेल में गिर गया। आर्यन की उम्र पांच वर्ष है। तब से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। NDRF की टीम समेत कई लोग बच्चे को बचाने में जुटे हैं। बोरवेल के पास एक गड्ढा खोदा गया है। आर्यन की स्थिति जानने के लिए कैमरा भी बोरवेल में डाला गया है। साथ ही ऑक्सीजन भी बराबर गड्ढे में पहुंचाई जा रही है। बचावकर्ताओं के अनुसार आधी रात लगभग 2 बजे के करीब कैमरे में आर्यन की मूवमेंट देखी गई थी।
किरोड़ी लाल मीणा ने बोरवेल पर कानून बनाने की कही बात
बोरवेल में गिरे आर्यन का हाल जानने मंगलवार शाम राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा कालीखाड गांव पहुंचे है। मीणा ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोग बोरवेल को खुला छोड़ देते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। इस पर सरकार को कोई कानून बनाएं, ताकि इस तरह के हादसे की पुनरावृत्ति न हो। मंत्री ने घटनास्थल पर पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों से बच्चे को बचाने के लिए उचित दिशा निर्देश भी दिए। इस मौके पर डॉक्टर मीणा ने कहा कि जब से बच्चा बोरवेल में गिरा है, तब से मैं दौसा जिला अधिकारियों के संपर्क में लगातार बना हुआ हूं।