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Dausa Borewell Accident: 57 घंटे की कोशिशें बेकार, पानी ने ले ली आर्यन की जान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा

Thu, 12 Dec 2024 05:33 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

राजस्थान के दौसा जिले के कालीखाड़ गांव में बोरवेल में गिरे 5 वर्षीय आर्यन को बचाने के लिए 57 घंटे का लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। बुधवार रात करीब 12 बजे आर्यन को बोरवेल से बाहर निकालने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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दौसा में बोरवेल से निकाल गया आर्यन का शव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के दौसा जिले में बोरवेल में गिरे आर्यन(5) को तीन दिन के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बचाया नहीं जा सका। तीन बाद बोरवेल से मासूम के शव को बाहर निकाला गया। दिन बाद बाहर निकाला जा सका। बुधवार की रात करीब 12 बजे मासूम को बाहर निकालने के कुछ मिनट बाद ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। गुरुवार को आर्यन के शव का पोस्टमॉर्टम किया गया। पीएम रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार आर्यन की मौत पानी में डूबने की वजह से हुई।

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जानकारी के अनुसार बोरवेल से निकालने के बाद आर्यन को रात रामकरण जोशी जिला चिकित्सालय दौसा में लाया गया था। सबसे पहले उसे आईसीयू में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भर्ती किया गया। वहां आर्यन का ECG किया गया। चिकित्सालय के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर दीपक शर्मा ने जानकारी दी कि आर्यन बोरवेल से जीवित नहीं निकल पाया। इसके बाद गुरुवार को आर्यन के शव का पोस्टमार्टम किया गया। डॉ. दीपक शर्मा ने बताया कि आर्यन की मौत पानी की वजह से हुई है। 

जानकारों के अनुसार आर्यन बोरवले में गिरने के बाद 147 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था। तब पानी उससे करीब 6 फीट नीचे था। जानकारों के अनुसार भूमि में पानी का लेवल घटता-बढ़ता रहता है। माना जा रहा है कि एकाएक पानी का लेवल बढ़ते-बढ़ते आर्यन के ऊपर तक आ गया होगा, जिस कारण से आर्यन की सांसें उखड़ गईं।
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ये है मामला
9 दिसंबर के दिन दोपहर लगभग 3:30 बजे दौसा के कालीखाड़ गांव का 5 वर्षीय आर्यन अपनी मां के साथ खेत में मौजूद था। उसकी मां अपने काम में व्यस्त थी और पास में ही आर्यन खेल रहा था। तभी अचानक आर्यन बोरवेल के नजदीक चला गया। उसकी मां देखा तो उसको पकड़ने के लिए दौड़ी लेकिन तब तक आर्यन बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही बीते 57 घंटे के दौरान जिला प्रशासन एनडीआरफ, एसडीआरएफ के जवान लगातार आर्यन को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए हुए थे। इस दौरान कई तरह के प्रयास आर्यन को बचाने के लिए किए गए, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। 57 घंटे बाद आर्यन बोरवेल से निकला तो गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें उखड़ चुकी थीं।

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