जिले की एक अदालत ने 2016 में 10 वर्षीय एक बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अदालत में जांच की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाए जाने में पुलिस अधीक्षक को दोषी माना है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अनिल कुमार कौशिक ने इस मामले में पुलिस की एफआर पर संज्ञान लेते हुए आरोपी के साथ - साथ जांच अधिकारी एएसपी नीमकाथाना, दिनेश अग्रवाल को भी दोषी माना है।
अपर लोक अभियोजक शिवरतन शर्मा ने बताया कि आरोपी शिवराज सिंह के खिलाफ 10 वर्षीय बालिका से अश्लील हरकत और दुष्कर्म का मामला एक मार्च 2017 को दर्ज कराया गया था। यह घटना 12 अप्रैल 2016 की है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जांच में बताया कि शिवराज के खिलाफ शिकायत 2016 में पीड़िता की मां की तरफ से दर्ज करवाई गई थी। इस मामले में एफआर पेश होने पर झूठा मामला बनाकर अभियोग दर्ज करा दिया गया।
उन्होंने बताया कि न्यायालय ने मामले के अभियुक्त शिवराज सिंह के साथ जांच अधिकारी एएसपी के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अभियुक्तों को समन जारी कर तलब किया गया है। मामले में 23 मई को न्यायालय पत्रावली पेश की जाएगी। शर्मा के मुताबिक अदालत ने कहा कि पीड़ित बालिका ने धारा 164 के तहत दिए बयानों में अपने साथ दुष्कर्म होने की बात कही है। लचर अनुसंधान मनमाने तरीके से किया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि अनुसंधान अधिकारी (आईओ) का ध्यान आरोपी को बचाने के लिए साक्ष्य संकलित करने की ओर ही रहा।