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Congress Politics: गहलोत के दौड़ में रहते पायलट-जोशी नहीं बन पाए सीएम, एक-एक बार चूके, अब दोनों में टक्कर

सार

Congress Politics: राजस्थान के नए सीएम की दौड़ में शामिल सीपी जोशी 2008 में मुख्यमंत्री बनने से रह गए थे। पायलट 2018 में सीएम नहीं बन पाए थे। अब सीएम पद को लेकर इन दोनों नेताओं में टक्कर मानी जा रही है।  
 
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अशोक गहलोत, सचिन पायलट और सीपी जोशी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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Congress Politics: अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की संभावना के बीच राजस्थान के नए मुख्यमंत्री को लेकर दो नामों की चर्चा हो रही है। पहले नंबर पर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और दूसरे पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी का नाम लिया जा रहा है। ऐसा दूसरी बार है जब इन दोनों नेताओं का नाम सीएम पद की दौड़ में शामिल है। जोशी 2008 में मुख्यमंत्री बनने से रह गए थे तो वहीं पायलट 2018 में सीएम नहीं बन पाए थे। हालांकि, उन्हें प्रदेश का उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। दो साल 2020 में हुई राजनीतिक उठापठक के चलते पायलट को इस पद से हटा दिया गया था। 

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दरअसल, 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। 200 विधानसभा सीट पर कांग्रेस के महज 21 उम्मीदवार जीत पाए थे। इस कारारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। इस दौरान प्रदेश से पूरी कांग्रेस का सफाया हो गया था। 

कहा जाता है कि पार्टी को प्रदेश में एक बार फिर खड़ा करने के लिए पायलट ने बहुत मेहनत की। दावा किया जाता है कि 2018 के चुनाव से पहले पायलट ने करीब साढ़े पांच लाख किमी. की यात्रा कर कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा और पार्टी को भाजपा के मुकाबले में ला दिया था। ऐसे में यह भी कहा जाने लगा कि अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री सचिन पायलट ही होंगे। चुनाव बाद कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन पायलट सीएम नहीं बन पाए। 

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सचिन पायलट और सीएम गहलोत - फोटो : Social Media
क्यों सीएम बनने से रह गए पायलट?
मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट अकेले दौड़ में नहीं थे। अशोक गहलोत भी चुनाव मैदान में थे, इससे पहले वह दो बार सीएम भी रह चुके थे। इसके बाद गहलोत और पायलट का सियासी विवाद शुरू हो गया था। गहलोत ने कभी मुख्यमंत्री बनने से इनकार भी नहीं किया, उल्टा अपने अनुभव और लंबे समय से कांग्रेस के लिए काम करने की बात कहकर सचिन पायलट को कमतर साबित करने की कोशिश करते। इधर, विधानसभा चुनाव के नजीते आए तो कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं, पार्टी एक सीट से बहुमत पाने से पीछे रह गई। 

हालांकि, चुनाव परिणामों में प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए दावा पेश किया। इसके बाद राजनीतिक उठापटक शुरू हुई। एक तरह चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट सीएम दौड़ में गहलोत से पीछे रह गए। वहीं, दूसरी तरह अपनी जादूगरी में माहिर गहलोत अन्य पार्टियों और निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने नेताओं को अपने पाले में लाने में सफल हो गए। ऐसे में सरकार में शामिल होने वाले ज्यादातर विधायकों ने गहलोत को सीएम बनाने के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए। कुछ दिन चली उठापटक के बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा और गहलोत सीएम बन गए।   
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सीपी जोशी।
कैसे एक वोट से मात खा गए जोशी?  
2008 के विधानसभा चुनाव में सीपी जोशी के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी। जोशी उस दौर में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। उनके बाद अशोक गहलोत का नंबर आता था। उस समय उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। उन्होंने सबसे सुरक्षित सीट माने जाने वाली राजसमंद जिले की नाथद्वारा से पर्चा भरा था। इससे पहले वह इस सीट से 1980, 1985, 1998 और 2003 में जीत चुके थे।

ऐसे में उनके लिए यहां से चुनाव जीतना आसान माना जा रहा था, लेकिन हुआ ऐसा जो किसी ने नहीं सोचा था। सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हार गए। इस चुनाव में उनकी पत्नी ने वोट नहीं दिया था। कहा जाने लगा कि अगर यह वोट जोशी को मिल जाता तो वह उस समय ही प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाते। बाद में मीडिया से बात करते हुए जोशी ने इसकी पुष्टि भी की थी। उन्होंने कहा था,  'हां यह सच है... मेरी पत्नी और बेटी वोटिंग वाले दिन मंदिर गई हुई थीं, इस कारण वह मतदान नहीं कर पाईं थीं'। 

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