सचिन पायलट और सीएम गहलोत
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क्यों सीएम बनने से रह गए पायलट?
मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट अकेले दौड़ में नहीं थे। अशोक गहलोत भी चुनाव मैदान में थे, इससे पहले वह दो बार सीएम भी रह चुके थे। इसके बाद गहलोत और पायलट का सियासी विवाद शुरू हो गया था। गहलोत ने कभी मुख्यमंत्री बनने से इनकार भी नहीं किया, उल्टा अपने अनुभव और लंबे समय से कांग्रेस के लिए काम करने की बात कहकर सचिन पायलट को कमतर साबित करने की कोशिश करते। इधर, विधानसभा चुनाव के नजीते आए तो कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं, पार्टी एक सीट से बहुमत पाने से पीछे रह गई।
हालांकि, चुनाव परिणामों में प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए दावा पेश किया। इसके बाद राजनीतिक उठापटक शुरू हुई। एक तरह चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट सीएम दौड़ में गहलोत से पीछे रह गए। वहीं, दूसरी तरह अपनी जादूगरी में माहिर गहलोत अन्य पार्टियों और निर्दलीय चुनाव जीतकर विधायक बने नेताओं को अपने पाले में लाने में सफल हो गए। ऐसे में सरकार में शामिल होने वाले ज्यादातर विधायकों ने गहलोत को सीएम बनाने के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए। कुछ दिन चली उठापटक के बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री पद से संतोष करना पड़ा और गहलोत सीएम बन गए।