मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मानगढ़ धाम के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। सीएम गहलोत ने कहा कि आदिवासियों के तीर्थ मानगढ़ धाम के विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कराने की दिशा में भी राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से मानगढ़ धाम पर करवाए जा रहे विभिन्न विकास कार्यों को समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित बांसवाड़ा दौरे के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रधानमंत्री को दो बार पत्र लिखकर राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की मांग की है।
अपने पत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री को अवगत करवाया कि साल 1913 में मानगढ़ में गोविंद गुरू के नेतृत्व में एकत्रित वनवासियों पर ब्रिटिश सेना ने फायरिंग की। इस फायरिंग में 1500 से अधिक वनवासियों ने अपना बलिदान दिया। वनवासियों के बलिदान और गोविन्द गुरू के योगदान को रेखांकित करने के लिए राज्य सरकार ने मानगढ़ धाम में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय बनाया है।
मुख्यमंत्री गहलोत ने पत्र लिखा कि जनजाति बहुल क्षेत्र बांसवाड़ा और डूंगरपुर आदि जिलों के जनप्रतिनिधियों की ओर से मानगढ़ को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने की मांग की जा रही है। पहले भी आठ अगस्त, 2022 को भी इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र को पत्र लिखा गया था।
बता दें कि राष्ट्रीय प्राचीन स्मारकों को प्राचीन संस्मारक और पुरातत्त्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत परिभाषित किया गया है। अधिनियम के तहत ऐतिहासिक, पुरातात्त्विक एवं वास्तुकला संबंधी महत्व को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की घोषणा की जाती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो आजादी की अलख जगाने के लिए 1500 आदिवासी भाइयों के सर्वोच्च बलिदान के कारण यह स्थल ऐतिहासिक महत्व की हो जाती है। राष्ट्रीय संस्मारक प्राधिकरण इस सम्बन्ध में उचित कार्यवाही कर मानगढ़ को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित कर सकती है। प्रधानमंत्री मोदी से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक का दर्जा प्रदान कराने का आग्रह किया। जिससे अमूल्य बलिदान देने वाले वनवासियों एवं नवचेतना के संचार में योगदान देने वाले महान संत गोविन्द गुरू को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की जा सके।