राजस्थान के टोंक शहर के सआदत अस्पताल में बुधवार को चौबीस वर्षीय महिला ने दो सिर वाले बच्चे को जन्म दिया है। यह बच्चा चर्चा का विषय बन गया। मां व बेटा दोनों स्वस्थ हैं।
बच्चे को जयपुर के जे.के. लोन अस्पताल भर्ती किया गया है, जहां उसकी जांचें चल रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति 10 लाख प्रेगनेंसी में से एक में पाई जाती है।
जयपुर के शिशु रोग विशेषज्ञ और जेके लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एस.डी. शर्मा ने बताया कि सर्जरी से बच्चे के सिरों को अलग करना संभव नहीं हैं।
बच्चे के हाथ व पैर सामान्य बच्चों की तरह ही दो-दो हैं, लेकिन लेकिन स्पाइन और नाडी सहित पूरा नर्वस सिस्टम अलग-अलग है। उनके अनुसार नवजात की एक्स-रे जांच में पता चला है कि उनकी रीढ़ की हड्डी भी अलग-अलग है।
कूल्हे की हड्डी और गुप्तांग एक है। सर्जरी से सिरों को अलग करना संभव नहीं है। टोंक जिले की की डॉ. गीता माहेश्वरी की देख-रेख में यह प्रसव हुआ था।
उन्होंने बताया कि बच्चा अलग-अलग रोता है। उन्होंने बताया कि बाएं पैर मे चुटकी लेने पर उसी दिशा के मुंह से रोता है और दाएं पैर में चुटकी लेने पर दाएं मुंह से रोता है।
चिकित्सकों ने बताया कि ऐसे बच्चे हमेशा एक जैसे होते हैं, क्योंकि वे एक ही अंडाणु से विकसित होते हैं। जब एक ही अंडाणु अलग हो जाता तो, ऐसी स्थिति में शरीर से जुड़े बच्चे पैदा होते हैं।
यह गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पाई है कि इन्हें कैसे अलग किया जा सकता है। अत्याधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए भी यह बड़ी चुनौती है। इससे पूर्व देश में एकमात्र जबलपुर में ऐसा मामला पाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद मौत हो गई थी।
ऐसे बच्चे जो एक ही शरीर व ऑर्गन सिस्टम शेयर करते हैं। ये अंग्रेजी अक्षर वाई के आकार में आपस में जुड़े होते हैं। आधे से ज्यादा तो प्रेगनेंसी का पूरा वक्त भी नहीं निकाल पाते और जन्म लेने वाले ऐसे बच्चों में या तो एक स्टिल बॉर्न ;गर्भ में ही मृत होता है या इनकी मौत जन्म के कुछ ही वक्त में हो जाती है। जानकारों के मुताबिक इस तरह का हरेक जन्म इतना दुर्लभ होता है कि सभी के अपने विशेष फीचर मौजूद होते हैं।