नवजात के लिए मौसी बनी जीवन का सहारा
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पीबीएम अस्पताल इन दिनों प्रसूताओं की बिगड़ती तबीयत और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर चर्चा में है। इसी बीच अस्पताल से इंसानियत, रिश्तों और ममता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। एक तरफ मां आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही है, तो दूसरी तरफ नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी उसकी मौसी ने संभाल ली है। इतना ही नहीं, मौसी बच्चे को अपना दूध पिलाकर मां की कमी पूरी करने की कोशिश कर रही है।
डिलीवरी के बाद गंभीर हुई मां, आईसीयू में चल रहा इलाज
गंगा शहर क्षेत्र के श्रीरामसर निवासी शारदा की डिलीवरी के बाद तबीयत अचानक गंभीर हो गई। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें पीबीएम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। हालांकि उनकी स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। संक्रमण के खतरे को देखते हुए डॉक्टरों ने दस दिन के नवजात बच्चे को मां से अलग रखा है, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। ऐसे में बच्चे को मां के प्यार और मां के दूध दोनों की जरूरत महसूस हो रही थी।
मौसी ने निभाई मां की भूमिका
परिवार के इस कठिन समय में बच्चे की मौसी सुनीता आगे आईं और उन्होंने नवजात की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। वह सिर्फ बच्चे की देखभाल ही नहीं कर रहीं, बल्कि उसे अपना दूध पिलाकर मां की कमी को भी पूरा करने का प्रयास कर रही हैं। अस्पताल में मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भावुक करने वाला रहा। एक तरफ आईसीयू में भर्ती मां जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है, तो दूसरी तरफ मौसी अपने भांजे को गोद में लेकर उसकी हर जरूरत का ख्याल रख रही है।
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समय पर दूध, पूरी देखभाल और ममता का साथ
मौसी सुनीता बच्चे को समय पर दूध पिलाने से लेकर उसकी देखभाल, सुरक्षा और जरूरतों का पूरा ध्यान रख रही हैं। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ मजबूरी नहीं, बल्कि रिश्तों की सच्ची ताकत और ममता की मिसाल है। परिजनों का कहना है कि जब मां इलाज के कारण अपने बच्चे से दूर है, तब मौसी ने मां का दूसरा रूप बनकर उसे संभाल लिया है। यह घटना बताती है कि मुश्किल वक्त में रिश्ते और मानवता ही सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। पीबीएम अस्पताल से सामने आई यह तस्वीर समाज को एक भावुक संदेश देती है कि ममता केवल जन्म देने से नहीं, बल्कि निभाने से भी पूरी होती है।