री-नीट परीक्षा से महज तीन दिन पहले भीलवाड़ा में फर्जी पेपर बेचने वाले आरोपी की कल रात गिरफ्तारी ने सनसनी फैला दी है। आरोपी टेलीग्राम चेनल के जरिए अभ्यर्थियों को असली पेपर के नाम पर फर्जी प्रश्नपत्र बेच रहा था। मामले में अब पुलिस ने जांच तेज कर दी है और पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। आरोपी को शुक्रवार को भीलवाड़ा के एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया जहां से कोर्ट ने उसे पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
पुलिस ने गुरुवार मध्य रात शहर के पटेल नगर क्षेत्र से 19 वर्षीय आकाश चौधरी को गिरफ्तार किया था। आरोपी जयपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और हाल ही में भीलवाड़ा लौटा था। जांच में सामने आया कि उसने टेलीग्राम पर ‘पेपर माफिया’ नाम से चैनल बना रखा था, जिसमें 52 सदस्य जुड़े हुए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने जांच सीओ सदर नेमीचंद चौधरी को सौंप दी है। शुक्रवार को आरोपी आकाश चौधरी को भीलवाड़ा के एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे 22 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। आरोपी री-नीट परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से प्रति पेपर चार-चार हजार रुपये वसूल रहा था। भुगतान के लिए वह क्यूआर कोड भेजकर रकम अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवाता था। पुलिस ने उसके कब्जे से मोबाइल फोन, नीट की किताब और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं।
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प्रताप नगर थाना प्रभारी सुनील ताड़ा ने बताया कि भारत सरकार के एस-मेक पोर्टल के माध्यम से एसपी कार्यालय की विशेष शाखा को सूचना मिली थी कि सोशल मीडिया पर कोई व्यक्ति पेपर लीक के नाम पर संदिग्ध गतिविधियां चला रहा है। साथ ही डीएसटी को भी इनपुट मिला कि पटेल नगर स्थित एक मकान में रहने वाला युवक ऑनलाइन फर्जी पेपर बेच रहा है।
अब तक की पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अमेरिका आधारित वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था। इसी माध्यम से वह टेलीग्राम चैनल संचालित कर अभ्यर्थियों से संपर्क साधता था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आकाश नीट की किताब के पन्नों को स्कैन कर डमी पेपर तैयार करता था और उन्हें असली प्रश्नपत्र बताकर बेचता था।
पुलिस अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जी पेपर रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, अब तक कितने अभ्यर्थियों से ठगी की गई और बैंक खातों में कितनी रकम ट्रांसफर हुई। टेलीग्राम चैनल से जुड़े 52 सदस्यों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान इस पूरे गिरोह से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।