भरतपुर। पूर्वी राजस्थान के सबसे बड़े और पांच नदियों के संगम के रूप में पहचाने जाने वाले पांचना बांध से गंभीर नदी में छोड़ा गया पानी 4 दिन बाद रविवार को बयाना क्षेत्र के गांव कलसाड़ा की सीमा में पहुंचा। नदी के बहाव क्षेत्र में पानी आता देख ग्रामीण खुशी से झूम उठे। हालांकि पानी की रफ्तार धीमी होने के कारण ग्रामीणों की यह खुशी थोड़ी देर में काफूर हो गई।
पांचना बांध बनने के बाद करीब 4 दशकों से गंभीरा नदी पानी के लिए तरस रही थी। धीरे-धीरे यह रेगिस्तान में तब्दील होती जा रही है। सूखी पड़ी गंभीर नदी में करौली जिले में स्थित बांध से तब पानी छोड़ा गया जब वह ओवरफ्लो हो गया। पानी का लेवल बांध की क्षमता के अनुसार होने पर रविवार को फिर से बांध के तीन में से दो गेट बंद कर दिए गए। वर्तमान में केवल एक गेट से मात्र 400 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की गति से छोड़ा जा रहा है। जबकि पूर्व में तीन गेट खोलकर 3000 क्यूसेक प्रति सेकेंड की गति से पानी छोड़ा जा रहा था।
पानी की धीमी गति को देखकर लगने लगा है कि यह बयाना उपखंड मुख्यालय तक नहीं पहुंच सकेगा और गंभीर नदी फिर से प्यासी रह जाएगी। किसान उम्मीद लगाए बैठे थे कि गंभीर नदी में पानी आने से बयाना क्षेत्र में तेजी से गिरता भूमिगत जल स्तर फिर से ऊपर आ सकेगा और जमीन की उपजाऊ क्षमता व पैदावार बढ़ सकेगी। बांध के गेट बंद करने से स्थानीय ग्रामीण गुस्साए हुए हैं। इनमें इस बात को लेकर आक्रोश है कि पांचना बांध का पानी बयाना तक आने से पहले ही बांध के गेट बंद कर दिए गए।
आंदोलन की तैयारियों में जुटे
गंभीर नदी बचाओ अभियान के सदस्य उत्तम सिंह, आरक्षण संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष भूरा भगत एवं भाजपा नेता नरोत्तम सिंह तंवर ने बताया बांध के बंद किए गेटों को खोलने की मांग को लेकर ग्रामीण आंदोलन की तैयारियों में जुट गए हैं। उनका कहना है कि जिले के केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में पानी पहुंचने तक बांध से पानी की निकासी जारी रखी जाए। जिले के हिस्से का पानी बांध से नियमित रूप से गंभीर नदी में छोड़ जाए।
तटवर्ती इलाकों के लोगों को सतर्क किया
बयाना सीमा में पानी की आवक के साथ पुलिस व प्रशासन ने नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे गांवों के लोगों को सतर्क किया है। उन्हें नदी के बहाव क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह दी है। बहाव वाले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को ऊपरी स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। पटवारी रोहित कुमार ने बताया कि पांचना बांध से छोड़ा गया पानी रविवार को कलसाड़ा गांव की सीमा के पास नदी के बहाव क्षेत्र में प्रवेश कर गया। यह दोपहर 3:00 बजे बाद मोरोली गांव तक पहुंच जाएगा। नदी में पानी को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी है। नदी के भाग क्षेत्र में पोखर नुमा बड़े-बड़े गड्ढे हो रहे हैं। इससे फिलहाल ऐसा लग रहा है कि पानी ज्यादा दूर तक नहीं जा पाएगा।
बांध में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए फिलहाल दो गेटों को बंद कर दिया गया है। एक गेट से 400 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की गति से छोड़ा जा रहा है। स्तर सामान्य होने पर सोमवार को तीसरे गेट को भी बंद किया जा सकता है।
सुशील गुप्ता, एक्सईएन, जल संसाधन विभाग, करौली