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Bharatpur News: पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का निधन

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परिजनों के साथ पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह- फाइल फोटो
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भरतपुर। जिले के गांव जघीना निवासी पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह का शनिवार देर रात 95 साल की उम्र में दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से भरतपुर समेत देश और प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
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कुंवर नटवर सिंह का जन्म भरतपुर जिले के डीग (वर्तमान में जिला) में 16 मई 1929 को हुआ था। यहां उनके पिताजी सरकारी सर्विस करते थे। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बहन हेमेंद्र कौर से उनका विवाह हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा डीग से प्राप्त करने के बाद नटवर सिंह ने अजमेर के मयो कॉलेज, ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में पढ़ाई की और दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली थी। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए केम्ब्रिज चले गए। इसके बाद चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में कुछ समय के लिए विजिटिंग स्कॉलर भी रहे।

इसी दौरान उनका चयन भारतीय विदेश सेवा के लिए हो गया। उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान चीन, न्यूयॉर्क, पोलैंड, इंग्लैंड, पाकिस्तान, जमैका और जांबिया आदि देशों में काम किया। वर्ष 1984 में नटवर सिंह ने आईएफएस की सर्विस से इस्तीफा देकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
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वे भरतपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीतकर केंद्र में राज्य मंत्री बने। उस समय उन्हें इस्पात, कोयला और कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। वर्ष 1984 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया था। कुंवर नटवर सिंह वर्ष 1986 में विदेश मामलों के राज्यमंत्री बनाए गए। इस दौरान 1987 में न्यूयॉर्क में आयोजित निरस्तीकरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का उन्हें अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 42वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। वर्ष 1989 में कुंवर नटवर सिंह ने उत्तर प्रदेश की मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद 1991 में कांग्रेस सत्ता में लौटी और पीवी नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने। कुंवर नटवर सिंह के तत्कालीन प्रधानमंत्री राव से मतभेद रहे। इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी और अर्जुन सिंह के साथ कांग्रेस को अलविदा कहकर नई पार्टी का गठन कर लिया था। हालांकि 1998 में सोनिया गांधी के आग्रह पर तीनों नेताओं ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया था। वर्ष 1998 के आम चुनाव में कुंवर नटवर सिंह ने भरतपुर सीट से एक बार फिर कांग्रेस से लोकसभा का चुनाव लड़ा और भाजपा के दिग्गज नेता डॉक्टर दिगंबर सिंह को हराया था।

वर्ष 2002 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए थे। 2004 में कांग्रेस की सत्ता में एक बार फिर वापसी के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में उन्होंने विदेश मंत्री का प्रभार संभाला था। वर्ष 2014 में कुंवर नटवर सिंह द्वारा लिखी पुस्तक ने भारत की सियासत में हलचल मचा दी थी। कुंवर नटवर सिंह के पुत्र कुंवर जगत सिंह वर्तमान में भरतपुर जिले की नदबई विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं।
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