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Rajasthan: गिरल माइंस धरने के बीच विधायक रविन्द्र भाटी की तबीयत बिगड़ी, धरनास्थल पर डॉक्टरों ने चढ़ाई ड्रिप

Wed, 13 May 2026 03:09 PM IST
बाड़मेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर

सार

Rajasthan News: बाड़मेर की गिरल लिग्नाइट माइंस में जारी आंदोलन के नौवें दिन शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की तबीयत बिगड़ गई। धरनास्थल पर ही डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप लगाई। भाटी ने कहा कि यह लड़ाई श्रमिकों के सम्मान और अधिकारों की है और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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धरने पर बैठे विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की बिगड़ी तबीयत - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। करीब एक महीने से जारी इस धरने में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार नौवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ डटे रहे। तपती गर्मी के बीच धरनास्थल पर लगातार मौजूद रहने के कारण बुधवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें ड्रिप लगाकर प्राथमिक उपचार दिया। फिलहाल उनका इलाज धरनास्थल पर ही जारी है।
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श्रमिकों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन जारी
गिरल माइंस में स्थानीय श्रमिकों, ड्राइवरों और ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन जारी है। विधायक रविन्द्र सिंह भाटी बीती रात भी धरनास्थल पर ही श्रमिकों और ग्रामीणों के बीच रुके थे। उनकी लगातार मौजूदगी से आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई मजबूती मिली है।

यह संघर्ष सम्मान और अधिकारों की लड़ाई- रविंद्र भाटी
धरनास्थल पर विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि यह आंदोलन केवल मजदूरों की नौकरी का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि जब तक श्रमिकों और ग्रामीणों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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हर स्थिति के लिए रहें तैयार
रविंद्र सिंह भाटी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं तो सरकार, जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा- 'मैं अभी सिर्फ धरने में बैठा हूं। हमने लोगों से शामिल होने का आह्वान नहीं किया है। यदि आह्वान कर दिया तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।'

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शांति बनाए रखने की अपील
विधायक भाटी ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उनकी कोशिश है कि कानून व्यवस्था बनी रहे। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हालात बदले तो उसके परिणामों की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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श्रमिकों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी श्रमिकों की मांगों में निकाले गए 100 से अधिक ड्राइवरों की पुनर्बहाली, ड्यूटी का समय 8 घंटे तय करना, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना और श्रमिकों को नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। श्रमिकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

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