बाड़मेर में नगर निकाय चुनाव के नामांकन वापसी के आखिरी दिन भाजपा और आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। आरएलपी ने प्रत्याशी पर दबाव बनाकर नामांकन वापस कराने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इसे खारिज कर स्वेच्छा से नामांकन वापस लेने की बात कही।
नगर निकाय चुनाव में नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन गुरुवार को बाड़मेर उपखंड कार्यालय के बाहर भाजपा और आरएलपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव किया और मामला शांत कराया। आरएलपी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने वार्ड नंबर 43 के आरएलपी प्रत्याशी धर्माराम प्रजापत पर दबाव बनाकर जबरन नामांकन वापस कराया है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रत्याशी ने अपनी इच्छा से उपखंड कार्यालय पहुंचकर नामांकन वापस लिया है।
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आरएलपी जिलाध्यक्ष जलाराम ने मामले में बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के लोग बुधवार रात से ही वार्ड नंबर 43 के प्रत्याशी धर्माराम प्रजापत के पीछे लगे हुए थे। उन्होंने दावा किया कि प्रत्याशी को प्रलोभन देने का भी प्रयास किया गया लेकिन उसने नामांकन वापस लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद उसे जबरन उपखंड कार्यालय ले जाया गया। जलाराम ने कहा कि आरएलपी कार्यकर्ताओं ने जब इसका विरोध किया तो भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ उनका विवाद हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान आरएलपी कार्यकर्ताओं के कपड़े फाड़े गए और एक कार्यकर्ता के गले में पहनी रुद्राक्ष की माला भी तोड़ दी गई। उन्होंने पुलिस-प्रशासन पर पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बने रहने का आरोप लगाया।
वहीं भाजपा नेता स्वरूपसिंह खारा ने आरएलपी के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएलपी कार्यकर्ता एसडीएम कार्यालय से प्रत्याशी को जबरन ले जाने का प्रयास कर रहे थे। खारा ने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में एसडीएम कार्यालय से प्रत्याशी को ले जाने की कोशिश करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी ने एसडीएम कोर्ट में पेश होकर अपनी इच्छा से नामांकन वापस लिया है। खारा ने कहा कि यदि प्रत्याशी पर किसी तरह का दबाव होता तो वह अपनी मर्जी से नामांकन वापस नहीं लेता। उन्होंने प्रत्याशी को जबरन ले जाने या अपहरण के आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा ने पूरे घटनाक्रम पर दोनों दलों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी मजबूत और टिकाऊ होना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति पैदा ही न हो। हालांकि यदि कोई प्रत्याशी लोकतांत्रिक तरीके से नामांकन वापस लेना चाहता है तो उसे शांतिपूर्ण तरीके से प्रक्रिया पूरी करने दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए और सभी पक्षों को शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।