थार की लोक संस्कृति में कला व कलाकारों ने सदियों से अपनी अनूठी छाप छोड़ी है, इसी कला को जीवित रखने के लिए रूमा देवी फाउंडेशन व ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान द्वारा शनिवार से बाड़मेर के द हवेली रिसॉर्ट में दो दिवसीय वाणी उत्सव व दानजी स्मृति मारवाड़ भजनी पुरस्कार समारोह का आगाज होगा।
वाणी और हरजस गायन जो कि गांव और ढाणियों तक सीमित है इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए रूमा देवी फाउंडेशन ने इस पहल के माध्यम से हुनरमंद बहनों को आगे लाने का प्रयास किया है। कबीर, मीरा, गोरख, दादू, डूंगरपुरी जैसे संतों की वाणियों का आगाज आज दिन में दो बजे से शुरू होगा, वहीं शाम को 7 बजे मुख्य कार्यक्रम प्रारंभ होगा। रविवार सुबह प्रभात सत्संग व दिन में पुरस्कार व सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
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कार्यक्रम में राजस्थान समेत मध्यप्रदेश, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र से भी बड़ी तादाद में आवेदन आए हैं। मध्यप्रदेश के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय कलाकार पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया, कच्छ के प्रसिद्ध वाणी गायक मुरालाला, जैसलमेर के महेशाराम, इंदौर के राजमल मालवीय, जालौर के जोगभारती, सांचौर के सुरेश लोहार, थराद के जयराम दास जैसे कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के वाणी गायकों के साथ ही राजस्थान के विभिन्न गांवों से आने वाले वाणी गायक इस उत्सव में सम्मलित हो रहे हैं।
इस आयोजन में पुरानी राग-रागनियों, सुर-ताल और पारंपरिक भजनों की शृंखला का अद्भुत समागम होगा। उत्सव में इस बार कुल पांच मंच प्रस्तुतियों के लिए बने हैं, जिसमें पहले दिन शनिवार को तीन मंच पर कार्यक्रम होंगे, वहीं दूसरे दिन रविवार की सुबह व दिन में दो मंचों पर प्रस्तुतियां सुनने को मिलेंगी। साथ ही एक कला प्रदर्शनी भी लगेगी, जिसमें थार की कला व संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा।