लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत विशेष अदालत ने किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म करने के एक मामले में मध्यप्रदेश के निवासी आरोपी को दोष सिद्ध होने पर 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने से दंडित किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गत दो जनवरी 2022 को पीड़िता किशोरी के पिता ने थानाधिकारी पुलिस थाना आनंदपुरी के समक्ष उपस्थित होकर एक रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 21 दिसंबर 2021 को सुबह करीब नौ बजे उसकी 11वीं कक्षा में अध्ययनरत नाबालिग बेटी घर से कपड़े सिलाने के लिए जाने का कहकर निकली, किन्तु शाम तक वापस घर नहीं आई। उसने आसपास सहित अपनी ससुराल और रिश्तेदारी में काफी तलाश की, किन्तु कुछ पता नहीं चल पाया।
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इस पर पुलिस ने अपहरण का प्रकरण दर्ज किया। पुलिस ने मामले के अनुसंधान के बाद नाबालिग को दस्तयाब किया और आरोपी प्रभाकर पुत्र भीखा निवासी देवनाला छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में नाबालिग का अपहण के बाद दुष्कर्म करना भी सामने आया। मामले में अनुसंधान अधिकारी ने न्यायालय में आरोपी के खिलाफ चार्जशीट पेश की।
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विशिष्ट लोक अभियोजक हेमेंद्रनाथ पुरोहित ने बताया, न्यायालय की पीठासीन अधिकारी तारा अग्रवाल ने सरकारी और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी प्रभाकर को नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म करने का दोषी पाया। न्यायालय ने आरोपी प्रभाकर को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत 20 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। प्रकरण में दर्ज भारतीय दंड संहिता की धारा- 363, 366 और 344 में भी आरोपी को दोषी ठहराया गया। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी का एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगताने के भी आदेश दिए गए।