विमान हादसे में मृत बांसवाड़ा के चिकित्सक दंपती और उनके बच्चे।
इस बार का फादर्स डे बांसवाड़ा के जोशी परिवार के लिए असहनीय पीड़ा लेकर आया है। विदेश में बसने और एक नई शुरुआत करने का सपना लेकर अहमदाबाद से लंदन की उड़ान भरने निकले डॉ. प्रतीक जोशी, उनकी पत्नी डॉ. कौमी और उनके तीन मासूम बच्चे मिराया, नकुल और प्रद्युत अब इस दुनिया में नहीं रहे।
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर हुए विमान हादसे में इन पांचों की दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी ने डॉक्टर दंपति के माता-पिता डॉ. जे.पी. जोशी और डॉ. अनिता जोशी की दुनिया उजाड़ दी। प्रतीक उनका इकलौता बेटा था। अब इस हादसे के बाद बुजुर्ग जोशी दंपती को अपने जीवन की संध्या वेला में अपने बेटे, बहू और पोते-पोतियों की अर्थी को कांधे देने का दुःख सहना पड़ा है।
फादर्स डे पर मिलेगा बेटे का शव
रविवार को विश्वभर में फादर्स डे मनाया जा रहा है लेकिन बांसवाड़ा के जोशी परिवार के लिए यह दिन मातम से भरा रहेगा। शनिवार को मृतकों की डीएनए रिपोर्ट आने के बाद भी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी न होने से शव परिजनों को रविवार सुबह तक सौंपे नहीं जा सके थे। इस बात ने पीड़ा को और अधिक गहरा कर दिया है कि फादर्स डे पर एक पिता को अपने बेटे और पूरे परिवार के शव मिलेंगे। परिवार ने सभी शवों का अंतिम संस्कार अहमदाबाद में ही करने का निर्णय लिया है। बांसवाड़ा से उनके रिश्तेदार भी अहमदाबाद पहुंच चुके हैं।
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गम में डूबा मोहल्ला
जोशी परिवार की इस अकल्पनीय क्षति ने पड़ोसियों और जान-पहचान वालों को भी गहरे शोक में डाल दिया है। पड़ोसियों ने बताया कि डॉ. प्रतीक और उनका परिवार बेहद सरल, सादगीपूर्ण और मिलनसार था। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इतना विनम्र और सुलझा हुआ परिवार इस तरह बर्बाद हो जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही फादर्स डे पश्चिमी परंपरा से जुड़ा हो लेकिन यह दिन अब भारतीय समाज में भी भावनात्मक महत्व रखता है। ऐसे दिन पर जब एक पिता को अपने बेटे और पूरे परिवार की अर्थी उठानी पड़े, तो इससे बड़ा कोई दुःख नहीं हो सकता।