बांसवाड़ा में मंगलवार को आसमान में छाए बादल
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश में अपने निर्धारित समय से 8 दिन पहले दस्तक दे दी है। यह अब मुंबई तक भी पहुंच गया है। ऐसे में अब संभावना है कि मानसून जून के दूसरे सप्ताह तक बांसवाड़ा के रास्ते राजस्थान में भी प्रवेश कर लेगा। बांसवाड़ा को राजस्थान का चेरापूंजी कहा जाता है। राज्य में सबसे अधिक बारिश इसी जिले में दर्ज की जाती है। मानसून का प्रवेश भी पिछले कई वर्षों से बांसवाड़ा के रास्ते ही होता रहा है। इस बार भी यही संभावना है कि इसी रास्ते राजस्थान में मानसूनी बादल अपनी मेहर बरसाएंगे। यहां बारिश का सामान्य औसत 992 मिलीमीटर है। वर्ष 2024 में 1084.78 मिलीमीटर बरसात हुई थी। जिले में होने वाली बारिश को नापने के लिए 14 विभिन्न स्थानों पर वर्षामापी केंद्र स्थापित किए गए हैं।
राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिलों में यह मान्यता भी रही है कि मुंबई में बारिश होने के 7 से 10 दिन के भीतर यहां भी बारिश शुरू हो जाती है। चूंकि इस वर्ष मुंबई में मानसून समय से पहले आया है। ऐसे में यदि इन मान्यताओं पर गौर करें तो आगामी एक पखवाड़े के भीतर वागड़ में प्री मानसून शुरू हो जाएगा। सोमवार शाम भी डूंगरपुर में तेज बौछारें गिरीं, वहीं बांसवाड़ा में रात्रि में आसमान में बादलों ने डेरा डाल दिया। मंगलवार सुबह से आसमान में बादल छाए हुए हैं, हालांकि वातावरण में उमस है। कृषि अनुसंधान केंद्र के संभागीय निदेशक डॉ. हरगिलास के अनुसार मुंबई में मानसून एक पखवाड़ा पहले आ गया है। ऐसे में इस बार वागड़ में भी बरसात जल्द आएगी। किसानों को खरीफ फसल के लिए अपने खेत तैयार करना शुरू कर देना चाहिए।
मानसून सीजन में बांसवाड़ा पर्यटन की दृष्टि से देश में छठा डेस्टिनेशन माना जाता है। बरसात के बाद यहां प्रकृति अपना भरपूर सौंदर्य लुटाती है। हरी-भरी पहाड़ियां, मीलों तक अथाह जलराशि से पूर्ण माही बांध, अनेक लघु बांध और ऊंची पहाड़ियों के साथ यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारा जा सकता है।