बांसवाड़ा जिला मुख्यालय पर खांदू काॅलोनी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन के बाहर तार की बाउंड्री बनाने के लिए हरे पेड़ों की बलि दे दी गई। हरे पेड़ों को काटने के लिए तहसीलदार या सक्षम अधिकारी की अनुमति भी नहीं ली गई। सरेआम हरे पेड़ काटने के बावजूद भी प्रशासन ने चुप्पी साध ली। वहीं चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी मामले से किनारा करते नजर आए।
बाउंड्री के बाहर के भी पेड़ काटे गए
खांदू काॅलोनी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का आगामी समय में असेसमेंट होना है। इसके लिए भवन पर रंगरोगन के साथ ही परिसर के प्रवेश द्वार पर तार की बाउंड्री बनाने का कार्य किया गया, लेकिन इस कार्य की आड़ में परिसर में लगे हरे पेड़ों को काट दिया गया। हरियाली पर आरी चलाने के दौरान बाउंड्री से बाहर के पेड़ भी काट दिए गए।
चिकित्सक का बेतुका जवाब
हरे पेड़ काटने के मामले को लेकर जब खांदू काॅलोनी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सक हरीश कटारा से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने बेतुका जवाब दिया। पहले तो उन्होंने काम करने वाले पर दोषारोपण किया। इसके बाद बेतुका सा जवाब देते हुए कहा कि पेड़ कटने से क्या देश में ऑक्सीजन की कमी हो गई। वहीं इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. खुशपालसिंह राठौड़ ने कहा कि खांदू काॅलोनी अस्पताल परिसर में हरे पेड़ काटने की जानकारी नहीं है। प्रभारी चिकित्सक से जानकारी लेकर ही कुछ बता पाएंगे।
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तहसीलदार भी अनभिज्ञ
किसी भी सार्वजनिक स्थान पर हरे पेड़ काटने के लिए तहसीलदार को प्रार्थना पत्र देकर अनुमति ली जाती है। अनुमति मिलने पर ही पेड़ को काटा जा सकता है। वहीं इस मामले में तहसीलदार हरिनारायण सोनी ने कहा कि उनके कार्यालय से पेड़ काटने की किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है।