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Banswara News: 2500 करोड़ की सिंचाई परियोजना बदलेगी वागड़ की तस्वीर, 338 गांवों को मिलेगा पानी, 40% काम पूरा

Tue, 02 Jun 2026 03:00 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा

सार

करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से बन रही अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना बांसवाड़ा के किसानों की तस्वीर बदल सकती है। परियोजना में आधुनिक लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के जरिए हजारों हैक्टेयर कृषि भूमि तक पानी पहुंचाया जाएगा।
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परियोजना के तहत हो रहे निर्माण कार्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वागड़ अंचल के किसानों के लिए अपर हाई लेवल कैनाल सिंचाई परियोजना नई उम्मीद बनकर उभर रही है। करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद बांसवाड़ा जिले की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

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परियोजना से जिले की छह तहसीलों बांसवाड़ा, बागीदौरा, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, आनंदपुरी और गांगड़तलाई के 338 गांवों की लगभग 42 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि को लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे करीब साढ़े तीन लाख लोगों को लाभ होने की उम्मीद है।

माही बांध से शुरू होने वाली इस परियोजना की मुख्य नहर की लंबाई 102 किलोमीटर है। परियोजना के तहत 22.50 किलोमीटर लंबी सुरंग, एक्वाडक्ट और नदी पार करने के लिए साइफन का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा करीब 230 अन्य नहरी संरचनाओं, जैसे सुपर पासेज, ड्रेनेज साइफन, रोड ब्रिज, एस्केप कम क्रॉस रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर का निर्माण कार्य भी जारी है।
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270 हैक्टेयर निजी भूमि का होगा अधिग्रहण
परियोजना के लिए 78 गांवों की लगभग 270 हैक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। अब तक 67 गांवों की 211 हैक्टेयर भूमि के लिए करीब 47 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 13 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है। शेष भूमि अधिग्रहण और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी है।

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अब तक 945 करोड़ रुपये खर्च
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता प्रकाशचंद्र रेगर ने बताया कि परियोजना में अत्याधुनिक SCADA प्रणाली विकसित की जा रही है। इससे पूरी प्रेशर आधारित सिंचाई प्रणाली का संचालन और मॉनिटरिंग स्वचालित रूप से की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि परियोजना पर अब तक लगभग 945 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और करीब 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में 42 किलोमीटर लंबाई में नहर निर्माण का कार्य चल रहा है। इंटेक स्ट्रक्चर और स्लूइस बैरल का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि टनल, एक्वाडक्ट, साइफन और भूमिगत पाइप लाइन नेटवर्क का निर्माण विभिन्न स्थानों पर जारी है।

इस तरह खेतों तक पहुंचेगा पानी
जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता देवीसिंह बेनीवाल के अनुसार परियोजना के तहत अत्याधुनिक प्रेशर आधारित कमांड क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे खेत स्तर तक नियंत्रित और वैज्ञानिक सिंचाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

मुख्य नहर से प्रत्येक 200 हैक्टेयर क्षेत्र के लिए लगभग 200 डिग्गियां बनाई जाएंगी, जिन तक पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाएगा। इसके बाद डिग्गियों से करीब 5000 किलोमीटर लंबा भूमिगत एचडीपीई पाइप लाइन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इस नेटवर्क के जरिए प्रेसराइज्ड इरिगेशन प्रणाली से खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा। प्रत्येक सवा से डेढ़ हैक्टेयर क्षेत्र पर हाइड्रेंट पॉइंट विकसित किए जाएंगे, जहां से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा।
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किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
परियोजना के पूरा होने के बाद किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और मक्का, गेहूं, दलहन, तिलहन तथा बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा। साथ ही किसानों की आय में वृद्धि होगी और क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।

 

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