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राजस्थान: साधु की हत्या कर काट दिए थे दोनों पैर, सात साल बाद आरोपी को उम्रकैद; पहचान मिटाने की थी साजिश

Fri, 26 Jun 2026 09:24 AM IST
बालोतरा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा

सार

समदड़ी के चर्चित साधु हत्याकांड में सात साल बाद अदालत ने आरोपी ओमगिरी उर्फ ओमप्रकाश को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या के बाद शव के दोनों पैर काटकर साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने बिना प्रत्यक्षदर्शी के वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध किया।

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साधु हत्या मामले में आरोपी को उम्रकैद - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बालोतरा जिले के समदड़ी क्षेत्र में सात वर्ष पहले हुए चर्चित साधु हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। बालोतरा सेशन न्यायालय ने आरोपी ओमगिरी उर्फ ओमप्रकाश को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने माना कि पुलिस ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या की गुत्थी सुलझाकर आरोपी के खिलाफ मजबूत मामला पेश किया।
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खेत में मिला था क्षत-विक्षत शव
मामला 16 फरवरी 2019 का है। समदड़ी थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि सुरपुरा गांव स्थित धजाजाल बालाजी मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर खेत में एक व्यक्ति का शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतक की पहचान देवेन्द्रगिरी उर्फ जोगसिंह के रूप में की। शव कई दिन पुराना था। मृतक के दोनों पैर जांघों से कटे हुए थे और सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले थे। घटनास्थल पर वाहन के टायर और शव को घसीटकर ले जाने के निशान मिलने के बाद पुलिस ने इसे हत्या का मामला मानकर जांच शुरू की।

शराब के दौरान हुआ विवाद, बैसाखी से किया हमला
जांच में सामने आया कि आरोपी ओमगिरी धजाजाल हनुमान मंदिर में पुजारी के रूप में रहता था और मृतक का भी वहां नियमित आना-जाना था। घटना वाले दिन दोनों ने साथ बैठकर शराब पी थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बैसाखी से मृतक के सिर पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। आरोपी दोनों पैरों से दिव्यांग था और बैसाखियों के सहारे चलता था। शव को वाहन में रखने में दिक्कत होने पर उसने कुल्हाड़ी से मृतक के दोनों पैर काट दिए और शव को सुनसान इलाके में फेंककर पहचान छिपाने तथा साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया।
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बिना प्रत्यक्षदर्शी के पुलिस ने तैयार की मजबूत साक्ष्य श्रृंखला
इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। इसके बावजूद पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों, मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच, परिस्थितिजन्य तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मजबूत साक्ष्य श्रृंखला तैयार की। तत्कालीन थानाधिकारी एवं अनुसंधान अधिकारी भूटाराम ने वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी की और घटना के महज दो महीने बाद 18 अप्रैल 2019 को न्यायालय में आरोप-पत्र पेश कर दिया।

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केस ऑफिसर स्कीम में हुई निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केस ऑफिसर स्कीम में शामिल किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने समय-समय पर जांच और न्यायालयीन कार्रवाई की समीक्षा की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 23 गवाह और 74 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। लोक अभियोजक नेमाराम चौधरी ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपी के खिलाफ साक्ष्यों को मजबूती से रखा।

अदालत ने सुनाई उम्रकैद
सेशन न्यायाधीश एम.आर. सुथार ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक, परिस्थितिजन्य और दस्तावेजी साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय हैं। अदालत ने आरोपी ओमगिरी उर्फ ओमप्रकाश को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 201 के तहत साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए पांच वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया।
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पुलिस अधीक्षक रमेश ने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, वैज्ञानिक जांच और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाया जा सकता है।
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