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Balotra News: जिला सीमाओं में फेरबदल से सियासी उबाल तेज, अशोक गहलोत ने कहा- 'तुगलकी फरमान', भाजपा में जश्न

Mon, 05 Jan 2026 11:04 PM IST
बालोतरा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा

सार

राजस्थान सरकार द्वारा बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए फेरबदल से पश्चिमी राजस्थान में सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस ने इसे जनविरोधी बताते हुए विरोध शुरू कर दिया, जबकि भाजपा इसे प्रशासनिक संतुलन का फैसला बता रही है।
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सीमा फेरबदल पर कांग्रेस का सरकार पर हमला
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विस्तार
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पश्चिमी राजस्थान की राजनीति एक बार फिर जिला सीमाओं के सवाल पर उबाल पर है। बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए ताजा फेरबदल ने न सिर्फ प्रशासनिक ढांचे को झकझोर दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी आमने-सामने ला खड़ा किया है। कांग्रेस इस फैसले को जनविरोधी और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा इसे संतुलित प्रशासन और विकास की दिशा में जरूरी कदम करार दे रही है।

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31 दिसंबर का आदेश और सियासी तूफान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को एक अहम अधिसूचना जारी की। इसके तहत बाड़मेर जिले की गुड़ामालानी और धोरीमन्ना तहसीलों को बालोतरा जिले में शामिल किया गया, जबकि बालोतरा जिले की बायतु तहसील को हटाकर पुनः बाड़मेर जिले में जोड़ा गया।

आदेश सार्वजनिक होते ही पश्चिमी राजस्थान के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जबकि कुछ क्षेत्रों में भाजपा समर्थकों ने इसे सुधारात्मक फैसला बताते हुए जश्न मनाया।
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2023 के फैसले की उलटबांसी

दरअसल इस विवाद की जड़ वर्ष 2023 में है, जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बालोतरा को नया जिला घोषित किया था। उस समय बायतु तहसील को बालोतरा में शामिल किया गया था, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बाड़मेर जिले में ही रखा गया था। अब भाजपा सरकार द्वारा किए गए नए परिसीमन को कांग्रेस पूर्ववर्ती निर्णय को राजनीतिक कारणों से पलटने की कोशिश बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के प्रभाव आगामी विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों तक दिखाई दे सकते हैं।

धरने पर बैठे हेमाराम चौधरी

फैसले के विरोध में कांग्रेस ने खुला मोर्चा खोल दिया है। गुड़ामालानी से छह बार विधायक रह चुके वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने धोरीमन्ना उपखंड मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। कड़ाके की ठंड के बीच उन्होंने धरना स्थल पर ही कंबल ओढ़कर रात गुजारी।

धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। चौधरी ने फैसले को कागजी सुविधा बताते हुए कहा कि यह जमीनी हकीकत से कटे हुए अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय है।

हेमाराम चौधरी ने कहा कि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में शामिल करने से आम लोगों को जिला और उपखंड स्तर के कार्यों के लिए ज्यादा दूरी तय करनी पड़ेगी। उन्होंने मांगता गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि लोगों को अलग-अलग कामों के लिए अलग दिशाओं में लंबी यात्राएं करनी होंगी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी।

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कांग्रेस के सुर तेज

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस फैसले को तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि जिला मुख्यालय की दूरी बढ़ाना आमजन के साथ अन्याय है। वहीं बायतु से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने भी कड़ा विरोध जताते हुए इसे राजनीतिक मकसद से किया गया निर्णय बताया।

भाजपा का पलटवार

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रशासनिक संतुलन, क्षेत्रीय समानता और बेहतर शासन व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने से घबराई हुई है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
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सड़कों तक पहुंची सियासत

जहां कांग्रेस धरना-प्रदर्शन कर रही है, वहीं कई क्षेत्रों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने वाहन रैलियां निकालीं, पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। इससे साफ है कि यह फैसला केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि सियासत को सड़कों तक ले आया है।

फिलहाल बाड़मेर-बालोतरा सीमा विवाद एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। अब सवाल यह नहीं रहा कि तहसील किस जिले में जाएगी, बल्कि यह बन गया है कि जनता की सुविधा, प्रशासनिक तर्क और राजनीतिक हितों में से किसे प्राथमिकता मिलेगी। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार अपने फैसले पर अडिग रहती है या बढ़ते विरोध के दबाव में कोई संशोधन करती है।

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