पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से मादक पदार्थों और हथियारों की आपूर्ति को राजस्थान पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती करार दिया गया है। राजस्थान पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड के एडीजीपी दिनेश एमएन ने बताया कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए सामान गिराने का यह नया ट्रेंड पिछले चार से पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इस अवैध नेटवर्क के खिलाफ राजस्थान पुलिस, गंगानगर पुलिस, बाड़मेर पुलिस और एटीएस मिलकर लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने आईटीबीपी के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए यह जानकारी साझा की।
ड्रोन तस्करी पर कड़ा शिकंजा
एडीजीपी दिनेश एमएन ने कहा कि पाकिस्तान की सीमा से सटे इलाकों में हेरोइन, ड्रग्स और हथियारों की ड्रोन के जरिए सप्लाई को रोकना पुलिस बल के सामने मुख्य चुनौती है। राजस्थान पुलिस ने इस चुनौती के खिलाफ बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। कार्रवाई के तहत भारी मात्रा में मादक पदार्थ और हथियार जब्त करने के साथ ही स्थानीय नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है। इसके अलावा विदेश में बैठकर गिरोह चलाने वाले आकाओं तक भी पुलिस ने अपनी पहुंच बनाई है और उन पर नकेल कसी है।
सिपाही की महत्वपूर्ण भूमिका
अपने 30 साल के सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए दिनेश एमएन ने टीम वर्क की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे में एक कॉन्स्टेबल से लेकर पुलिस महानिदेशक तक सभी अधिकारी की श्रेणी में आते हैं और सभी के पास खुद को साबित करने के बराबर अवसर मौजूद होते हैं। किसी भी थाना प्रभारी या पुलिस अधीक्षक से किसी कॉन्स्टेबल की भूमिका कम नहीं होती है। वीरप्पन के खिलाफ चले अभियान और राजस्थान के 10 साल पुराने रणपाल सिंह एनकाउंटर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इन अभियानों की सफलता में कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल की सटीक सूचना और त्वरित कार्रवाई का विशेष योगदान रहा था।
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जनसेवा और सुरक्षा की भावना
आईटीबीपी के जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि खाकी वर्दी केवल आजीविका या नौकरी नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों की समस्याओं और परेशानियों को दूर करने का माध्यम है। पुलिस सेवा में मिलने वाले वेतन, सम्मान और सुविधाओं के मुकाबले सबसे बड़ा आत्मसंतोष किसी परिवादी का दर्द दूर करने और उसे सुरक्षा का भाव देने से हासिल होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी बड़े ऑपरेशन या एनकाउंटर में नाम चाहे किसी वरिष्ठ अधिकारी का सामने आए, लेकिन वास्तविक सफलता पूरी टीम की साझा मेहनत का प्रतिफल होती है। पुलिस बल का अंतिम लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां असामाजिक तत्व और अपराधी भयभीत रहें तथा आम जनमानस स्वयं को दिन-रात सुरक्षित महसूस कर सके।