नगर निगम द्वारा दिए गए नोटिस का खादिमों ने किया विरोध
अजमेर दरगाह शरीफ क्षेत्र में नगर निगम द्वारा आवासीय और वाणिज्यिक भवनों को एक समान मानकर नोटिस जारी करने पर खादिमों और क्षेत्रवासियों में रोष फैल गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में खादिमों सहित स्थानीय लोगों ने निगम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष सर्वे की मांग की। उनका कहना है कि निगम की यह कार्रवाई न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि इससे सैकड़ों परिवारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
आवासीय मकानों को भी वाणिज्यिक बताकर भेजे नोटिस
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निगम अधिकारियों द्वारा हाल ही में किए गए सर्वे में सभी भवनों को वाणिज्यिक गतिविधि से जुड़ा मानते हुए नोटिस थमा दिए गए। इस कार्रवाई का असर उन परिवारों पर भी पड़ा है जो पीढ़ियों से इन मकानों में रह रहे हैं और जिनका मकान पूरी तरह से आवासीय उपयोग में है। खादिम सैयद मोहम्मद मुजाहिद ने कहा कि निगम ने बिना भेदभाव किए सभी भवनों को एक ही श्रेणी में डाल दिया है, जिससे लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सीज कार्रवाई पर उठे सवाल
लोगों का कहना है कि निगम अधिकारी कई भवनों को सीज करने की कार्रवाई भी शुरू कर रहे हैं। अगर किसी मकान मालिक ने नक्शे के विपरीत एक या दो मंजिलें बना भी ली हैं, तो पूरी इमारत को सीज करना उचित नहीं है। इससे उन परिवारों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है जिनका भवन नियमों के अंतर्गत है।
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पूर्व पार्षदों ने भी जताई नाराजगी
पूर्व पार्षद आमद चिश्ती ने स्पष्ट कहा कि वह नियमों का पालन करने को तैयार हैं और यदि भवन की कोई अतिरिक्त मंजिल नियमों के खिलाफ है तो उसे गिराने तक के लिए सहमत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए वे निगम अधिकारियों के समक्ष शपथ पत्र देने को तैयार हैं। इसी तरह पूर्व पार्षद गुलाम मुस्तफा ने भी निगम प्रशासन से अपील की कि बिना निष्पक्ष जांच और भेदभाव किए किसी भी इमारत को सीज न किया जाए।
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निष्पक्ष सर्वे की मांग
खादिमों और क्षेत्रवासियों ने दोहराया कि निगम को दरगाह क्षेत्र में एक बार फिर से निष्पक्ष सर्वे करना चाहिए। इसमें आवासीय और वाणिज्यिक भवनों का अलग-अलग विवरण दर्ज किया जाए ताकि निर्दोष परिवारों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन उनकी परेशानी को समझे तो जल्द ही इस विवाद का समाधान संभव है।