एमडीएस विश्वविद्यालय के कुलसचिव कैलाश चंद्र शर्मा
जिले में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जिला कलेक्टर के बाद अब साइबर ठगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) के कुलसचिव एवं आरएएस अधिकारी कैलाशचंद्र शर्मा को निशाना बनाया है। ठगों ने उनका मोबाइल नंबर हैक कर व्हाट्सएप के माध्यम से उनके परिचितों और विश्वविद्यालय के कार्मिकों को पैसे मांगने के फर्जी संदेश भेजे।
कुलसचिव कैलाशचंद्र शर्मा ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक उनके मोबाइल नंबर से कई लोगों को व्हाट्सएप मैसेज भेजे गए। इन संदेशों में लिखा गया था कि किसी इमरजेंसी के कारण उन्हें तत्काल 30 हजार रुपए की आवश्यकता है और जल्द पैसे भेजने का अनुरोध किया गया। संदेश उनके नाम और पहचान का दुरुपयोग करते हुए भेजे गए, जिससे कई लोग भ्रमित हो गए।
विश्वविद्यालय में जिन कर्मचारियों और परिचितों के पास यह संदेश पहुंचे, उन्होंने तुरंत कुलसचिव शर्मा से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर जानकारी दी। तब जाकर उन्हें अपने मोबाइल नंबर के हैक होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने तत्काल जिला पुलिस की साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
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कुलसचिव ने बताया कि जब तक उनका मोबाइल नंबर हैक रहा, उस दौरान उनके फोन पर न तो कॉल आ रहे थे और न ही कोई मैसेज प्राप्त हो रहा था। साइबर सेल की तकनीकी टीम के प्रयासों के बाद कुछ समय में उनका मोबाइल नंबर फिर से सामान्य हुआ और कॉल व संदेश आने शुरू हो गए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और ठगों के नंबर व तकनीकी विवरण जुटाए जा रहे हैं।
बता दें कि इससे पहले भी जिले में इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बीते मंगलवार को जिला कलेक्टर सहित एक अन्य आईएएस अधिकारी का मोबाइल नंबर भी साइबर ठगों द्वारा हैक कर लिया गया था। ठगों ने एक इंटरनेशनल नंबर से जिला कलेक्टर की फोटो (डीपी) लगाकर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाया और लोगों से पैसों की मांग की थी। मामले में जिला कलेक्टर ने पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा को तुरंत जांच के निर्देश दिए थे। इसके अलावा प्रदेश स्तरीय विभाग में नियुक्त एक अन्य आईएएस अधिकारी का नंबर भी साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
लगातार हो रही इन घटनाओं से प्रशासनिक अधिकारियों और आम लोगों में चिंता बढ़ गई है। साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अधिकारी या परिचित के नाम से पैसे मांगने वाले संदेश मिलने पर तुरंत सत्यापन करें और बिना पुष्टि के किसी भी खाते में राशि ट्रांसफर न करें। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों को जल्द पकड़ने के लिए तकनीकी जांच तेज कर दी गई है।