अजमेर में भाजपा शहर अध्यक्ष रमेश सोनी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और अश्लील पोस्ट को रिपोस्ट करने के मामले में अदालत ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 ने गंज थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला फॉयसागर रोड निवासी श्रेयांस सुराणा द्वारा दायर इस्तगासे से जुड़ा है। परिवादी की ओर से एडवोकेट वैभव जैन ने अदालत में शिकायत पेश करते हुए बताया कि उनके भाई पीयूष सुराणा के फेसबुक अकाउंट से दिल्ली की मुख्यमंत्री को लेकर कथित आपत्तिजनक पोस्ट शेयर हुई थी। बाद में उसी पोस्ट को भाजपा शहर अध्यक्ष रमेश सोनी ने भी अपने फेसबुक अकाउंट से रिपोस्ट और शेयर किया।
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एक पर कार्रवाई, दूसरे पर खामोशी
परिवादी ने अदालत में आरोप लगाया कि गंज थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीयूष सुराणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उन्हें एक दिन के लिए जेल भी भेज दिया लेकिन उसी पोस्ट को रिपोस्ट करने वाले रमेश सोनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत में कहा गया कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति होने के कारण पुलिस ने मामले को दबाने का प्रयास किया। परिवादी ने बीएनएसएस की धारा 175(3) के तहत अदालत में इस्तगासा पेश कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
एडवोकेट वैभव जैन ने अदालत में दलील दी कि आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री को रिपोस्ट और शेयर करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध सामने आने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस के लिए अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, यूआरएल लिंक, आईपी लॉग और संबंधित डिवाइस की फॉरेंसिक जांच जरूरी है, जो केवल पुलिस जांच के जरिए ही संभव है।
कोर्ट ने दिए जांच के आदेश
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें, दस्तावेज और पुलिस की तथ्यात्मक रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मामला गंज थाना पुलिस को भेजते हुए रमेश सोनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं।