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'सत्ता का संग्राम': अजमेर में चाय पर चर्चा में मतदाता बोले- रोजगार सबसे जरूरी है; ताकि कमा खा सकें, घर चल पाए

Wed, 08 Nov 2023 10:19 AM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

Rajasthan Election 2023: अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' आज यानी आठ नवंबर को राजस्थान के अजमेर जिले में पहुंचा है। यहां सुबह-सुबह चाय की चुस्कियों के साथ लोगों ने विकास और अपनी समस्याओं पर खुलकर राय व्यक्त की। आइए जानते हैं लोग क्या बोले।
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अजमेर में सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'सत्ता का संग्राम' के तहत अमर उजाला का चुनावी रथ बुधवार को अजमेर पहुंचा। यहां पर लोगों ने अमर उजाला के साथ सरकार और विकास सहित अन्य मुद्दों पर अपनी बात रखी। साथ ही लोगों ने सरकार से क्या अपेक्षाएं की और क्या हुआ, इस पर भी राय व्यक्त की।

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'सबसे ज्यादा यहां पानी की समस्या है'
अमर उजाला से चाय पर चर्चा करते हुए एक मतदाता ने कहा कि विधायक ने काम तो बहुत किए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा समस्या पानी की रही है। बाकी तो सब काम अच्छे हुए हैं। काम की तो जरूरत हैं। सड़कें अब बनाने लगे हैं, अभी दो साल में काम हुआ है। वहीं, एक अन्य मतदाता ने बताया कि जब भी चुनाव आते हैं रोड बनने लग जाते हैं बस। चुनाव से पहले कुछ नहीं होता। चुनाव से पहले कोई नहीं सुनता है। चुनाव के वक्त कहते हैं कि आपके रोड बना रहे हैं, रोजगार देंगे और जीतने के बाद रवानगी ले लेते हैं। चुनाव से पहले नेता लोग अपनी मौज-मस्ती में रहते हैं।

'रोजगार मिलना सबसे जरूरी है'
वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि लोगों को रोजगार भी मिलना चाहिए। छोटा-मोटा धंधा ही सही, घर भी तो चलाना है। धंधा नहीं होगा तो आदमी कहां से कमा कर खाएगा। सबसे पहले रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। थोड़ी बहुत जगह देनी चाहिए काम करने के लिए, ताकि गुमटी वालों नगर निगम परेशान न कर सके। कुछ ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार की योजनाओं का आजतक हमको कोई फायदा नहीं मिला।
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'अजमेर में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं'
आशीष सोनी ने बताया कि मुद्दे तो अजमेर में काफी हैं। अजमेर को स्मार्ट सिटी के तहत 932 करोड़ रुपये मिला था। राजस्थान में पहला स्मार्ट सिटी अजमेर को घोषित किया गया। 932 करोड़ रुपये से अजमेर में कांच की सड़कें और कांच की नालियां बन सकती थीं। लेकिन अजमेर की दुर्दशा है, आखिर इतना बड़ा फंड गया तो कहां गया। उन्होंने कहा कि देवनानी जी पिछले सालों से लगातार विधानसभा में हैं। शिलान्यास करने में वे ज्यादा यकीन रखते हैं। अभी विधायक कोष से यहां रोड बनती है। पांच महीने में बनकर कंक्रीट रोड तैयार हो जाती है। फिर दो महीने के बाद कंक्रीट बाहर आने लगी है। यह क्या है, घोटाले पर घोटाला हुआ जा रहा है। वे न तो युवाओं को आगे आने दे रहे हैं। आज 71 साल की उम्र हो गई है उनकी, उनको रिटायर होना चाहिए था और युवा को आगे आने देना चाहिए था। देश युवा चलाएगा या बुजुर्ग चलाएगा। लेकिन इन्होंने अजमेर को और पांच साल में बर्बाद करने की ठान रखी है। आशीष सोनी ने कहा कि अब जनता जाग चुकी है। अबकी बार उन्हें उनके घर उदयपुर भेज देंगे।

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