फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Iran-Israel Conflict: पश्चिम एशिया तनाव से राजस्थान के ग्रेनाइट निर्यात पर संकट; निर्यात ठप, फैक्टरियां बंद

Fri, 27 Mar 2026 03:26 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

पश्चिम एशिया तनाव के चलते शिपमेंट लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। कंटेनर शुल्क 300 डॉलर से बढ़कर 2000 डॉलर तक पहुंच गया। बढ़ी लागत से निर्यात प्रभावित हुआ और ग्रेनाइट-मार्बल उद्योग गहरे संकट में फंस गया है।
विज्ञापन
ईरान-इस्राइल युद्ध का राजस्थान के ग्रेनाइट और मार्बल उद्योग पर गंभीर असर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब राजस्थान के ग्रेनाइट और मार्बल उद्योग पर गंभीर रूप से दिखने लगा है। निर्यात बाधित होने, समुद्री भाड़ा बढ़ने और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से उद्योग भारी संकट में पहुंच गया है। जालोर, किशनगढ़ और अजमेर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में बड़ी संख्या में फैक्टरियां बंद होने लगी हैं।

राजस्थान ग्रेनाइट माइनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष रामनिवास बापोरिया के अनुसार, जालौर में करीब 80% फैक्टरियां बंद होने के कगार पर हैं और जो चल रही हैं, वे भी अगले 15–20 दिनों तक ही टिक पाएंगी। उन्होंने बताया कि मार्बल, ग्रेनाइट और क्वार्ट्ज के लगभग 800 करोड़ रुपये प्रतिमाह के कारोबार पर असर पड़ा है।

किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन से जुड़े मनोज काबरा ने बताया कि ईरान-इजरायल/अमेरिका संघर्ष के कारण आयात-निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। समुद्री भाड़ा 25–30% तक बढ़ गया है, जिससे लागत बढ़ने के साथ नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे। अजमेर के रामलिया माइनिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र पूनिया ने कहा कि निर्यात लगभग रुक चुका है और परिवहन लागत कई गुना बढ़ गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि 300 डॉलर प्रति कंटेनर तय शिपमेंट की लागत बढ़कर 2000 डॉलर तक पहुंच गई, जिसमें युद्ध बीमा शुल्क शामिल है।

विज्ञापन


यह भी पढें- बिन्दायका फायरिंग कांड खुलासा: रंजिश के चलते प्रॉपर्टी डीलर पर बरसाईं थीं गोलियां, पुलिस के हत्थे चढ़े 4 आरोपी

जालौर सबसे ज्यादा प्रभावित, सैकड़ों यूनिट बंद
वैश्विक स्तर पर ग्रेनाइट निर्यात के लिए प्रसिद्ध जालोर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। पिछले दो सप्ताह में यहां करीब 250 यूनिट बंद हो चुकी हैं। पहले जहां प्रतिदिन 25 कंटेनर भेजे जाते थे, वहीं अब निर्यात लगभग ठप हो गया है।

ग्रेनाइट एसोसिएशन जालोर के अध्यक्ष रामकिशन रंवा ने कहा कि स्थिति बेहद अनिश्चित है और हालात नहीं सुधरे तो और इकाइयां बंद हो सकती हैं। स्थानीय निर्यातक अशोक कुमार ने बताया कि ऑर्डर बंद हो गए हैं, भुगतान अटक गया है, जिससे यूनिट बंद करना मजबूरी बन गई है।

पिछले एक वर्ष में पहले ही 1350 में से लगभग 750 यूनिट बंद हो चुकी थीं और अब हालात और बिगड़ गए हैं। इस संकट का सीधा असर रोजगार पर पड़ा है। 250 यूनिट बंद होने से 6,000 से अधिक मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं, जबकि हजारों अन्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

फैक्टरी संचालक श्रवणलाल के अनुसार, काम बंद होने से मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है और कई परिवारों के सामने भोजन तक की समस्या खड़ी हो गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट से उबरना पूरी तरह वैश्विक हालात के सामान्य होने पर निर्भर करेगा। तब तक राजस्थान का यह प्रमुख निर्यात आधारित उद्योग कठिन दौर से गुजरता रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें