राजस्थान सहित अजमेर में महावीर जयंती के अवसर पर घोषित ड्राई-डे के बावजूद शराब की बिक्री बेरोकटोक जारी रही। यह मामला प्रशासन और आबकारी विभाग की लापरवाही को उजागर करता है। शहर के कई इलाकों में ड्राई-डे के नियमों को दरकिनार करते हुए शराब की दुकानों पर धड़ल्ले से शराब बेची जा रही है।
अजमेर के जिला पुलिस अधीक्षक और जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने, केंद्रीय बस स्टैंड के पीछे कुंदन नगर रोड स्थित लक्ष्मीकांत टाक की दुकान, दो पल रेस्टोरेंट के पास अभिषेक टाक की दुकान और तोपदड़ा क्षेत्र में गढ़वाल पैलेस के पास स्थित शराब की दुकानों पर खुलेआम शराब बिक्री होती देखी गई। खास बात यह है कि दुकानों के शटर बंद थे, लेकिन अंदर से बिक्री जारी रही। यह न सिर्फ कानून की अवहेलना है, बल्कि प्रशासन की आंखों के सामने हो रही यह गतिविधि व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्राई-डे केवल नाम मात्र का रह गया है। ठेकेदारों को न तो पुलिस का डर है और न ही आबकारी विभाग की परवाह। उन्हें पहले से ही जानकारी होती है कि कहां और किस तरह से जांच होगी, जिसके चलते वे नियमों की धज्जियां उड़ाने से नहीं चूकते।
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जब इस संबंध में आबकारी सीआई आशीष यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वे अपने सर्किल में गश्त कर रहे हैं। उन्हें जैसे ही सूचना मिली, उन्होंने जांच कराने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि शराब ठेकों की सेल और परचेज का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। अगर कोई ठेकेदार ड्राई-डे पर शराब बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न केवल कानून के उल्लंघन को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह से नियमों का माखौल उड़ाया जा रहा है। यदि इस पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आगे भी ऐसे अवसरों पर ड्राई डे का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। आबकारी विभाग और पुलिस को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए दोषियों पर त्वरित और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।