यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की किशनगढ़ शाखा में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर 43.14 लाख रुपये का गोल्ड लोन लेने के मामले में गांधीनगर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने करीब ढाई साल से फरार आरोपी को उसके खेत से तलाश कर पकड़ा। इस मामले में पुलिस दो अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बैंक की ओर से सोने की शुद्धता की जांच कराए जाने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ था।
बैंक की जांच में खुली धोखाधड़ी की पोल
गांधीनगर थानाधिकारी अनिल कुमार शर्मा के अनुसार, वर्ष 2023 में आरोपियों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की किशनगढ़ शाखा में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर 43.14 लाख रुपये का गोल्ड लोन लिया था। शुरुआत में बैंक प्रबंधन ने आभूषणों को असली मानकर उनके बदले ऋण दे दिया। बाद में बैंक ने जब सोने की शुद्धता की जांच कराई, तो आभूषण नकली निकले। इसके बाद धोखाधड़ी का मामला सामने आया। इस संबंध में बैंक ने 13 अप्रैल 2024 को गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की और आरोपियों की तलाश में जुट गई।
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मुख्य आरोपी की तलाश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष टीम गठित की। टीम ने तकनीकी सहायता और जांच के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। इस दौरान पुलिस ने नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र के बंवरला गांव निवासी 34 वर्षीय सूरजादेवी और खोड़ा गणेश रोड स्थित न्यू हाउसिंग बोर्ड इलाके के निवासी 32 वर्षीय राकेश सोनी को गिरफ्तार किया। दोनों को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
खेत में तलाश कर पकड़ा गया मुख्य आरोपी
दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस बंवरला गांव निवासी 35 वर्षीय कैलाश मेघवाल की तलाश कर रही थी। करीब ढाई साल बाद पुलिस टीम ने उसे उसके खेत में तलाश कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य तथ्यों का पता लगाने में जुटी है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि नकली सोने के आभूषणों के जरिए गोल्ड लोन लेने की धोखाधड़ी को किस तरह अंजाम दिया गया था।