बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना का 8 सितंबर को अजमेर दरगाह का दौरा प्रस्तावित है। इसे लेकर अजमेर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। अजमेर पुलिस अधीक्षक चुनाराम के नेतृत्व में प्रधानमंत्री शेख हसीना के रूट को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए जा रहे हैं, जिसको लेकर तमाम पुलिस अधिकारियों और जवानों को उनकी ड्यूटी के बारे में जानकारी दी गई।
इस दौरान 6 आईपीएस और 12 एडिशनल एसपी के साथ ही दर्जनों पुलिस अधीक्षक एसआई रैंक के अधिकारी मॉनिटर के लिए तैनात किए जा रहे हैं। वहीं डेढ़ हजार होमगार्ड और पुलिसकर्मियों का जाब्ता चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखेगा, अजमेर पुलिस लाइन में एसपी चुनाराम और अन्य अधिकारियों द्वारा तमाम जाप्ते को दिशा-निर्देश दिए गए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
एसपी चुनाराम ने बताया, 8 तारीख को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना अजमेर दौरे पर हैं। इस दौरान सड़क माध्यम से उनका आना प्रस्तावित है। ऐसे में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कड़ी की जा रही है, आने जाने वाले तमाम लोगों के साथ ही ट्रैफिक और दरगाह में भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इन सभी विषयों को लेकर पुलिस के जवानों और अधिकारियों को उनकी ड्यूटी को लेकर जानकारी दी गई है, जिससे कि किसी तरह की समस्या उत्पन्न न हो और पीएम का शांतिपूर्ण दौरा आयोजित हो सके।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना दोपहर में अजमेर पहुंचेगी और सर्किट हाउस में कुछ देर विश्राम के बाद अजमेर दरगाह जियारत करने पहुंचेगी। जहां, वह नमाज भी अदा कर सकती हैं, कुछ समय दरगाह में बिताने के बाद वह सर्किट हाउस में रुककर जयपुर के लिए रवाना होंगी। इस दौरान सभी रास्ते बंद किए जाएंगे और दरगाह को भी खाली कराया जाएगा।
6 साल दिल्ली में रह चुकी हैं शेख हसीना
शेख हसीना छह साल दिल्ली में भी रह चुकी हैं। ये बात साल 1975 से 1981 की है। उस समय दिल्ली में उनका पता था, 56 Ring Road Lajpat Nagar-3। हालांकि बाद में वो दिल्ली के पंडारा पार्क के एक घर में शिफ्ट हो गई थीं. हालांकि लाजपत नगर में जहां वो रहती थीं, अब उस जगह पर एक Commercial Complex बन गया है। इससे पहले ये जगह बांग्लादेश की Embassy को दी गई थी। जो साल 2003 तक रही।
शेख हसीना 28 साल की उम्र में उस समय भारत आई थीं, जब साल 1975 में बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान उनके पिता शेख मुजीब उर रहमान और उनके परिवार के दूसरे सदस्यों की सेना ने हत्या कर दी थी। इस ऐतिहासिक घटना के दौरान शेख हसीना अपने पति के साथ जर्मनी में थीं। क्योंकि उनके पति एक Nuclear physicist थे, जो जर्मनी में ही रहते थे। इस वजह से उस दिन शेख हसीना और उनकी छोटी बहन शेख रेहाना इस हमले में बच गईं। लेकिन उनके पिता और परिवार के बाकी सदस्यों को बेरहमी से मार दिया गया था।