फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वैट रिफंड घोटाला: सीबीआई को डायरेक्टोरेट के आदेश का इंतजार

Wed, 04 Dec 2013 12:38 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पंजाब में पांच सौ करोड़ के वैट रिफंड घोटाले की जांच के लिए सीबीआई ने कमर कस ली है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश देने के बाद उद्योग, व्यापार जगत के साथ आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति है।

सीबीआई का कहना है कि केस से जुड़े रिकार्ड तलब करने के बाद एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी जाएगी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील ने दस्तावेजी सुबूत पेश करते हुए कहा कि बचाव पक्ष पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश माल भेजने का दावा कर रहा है लेकिन पंजाब से लेकर पश्चिम बंगाल तक के सभी आईओसी बैरियर के दस्तावेजों की जांच में इस माल की कहीं कोई एंट्री नहीं है।

इसके बाद कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश देने पर विभाग और ट्रेडर्स में हड़कंप की स्थिति है। सभी अपने बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने भी एक कार्यक्रम में वैट रिफंड घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखकर सरकार को नए नियम बनाने पड़े।
विज्ञापन


उन्होंने एक कार डीलर द्वारा की गई अनियमितता का उदाहरण देकर कहा कि मामले का खुलासा होने के बाद उक्त कंपनी ने पैसे भी जमा करवा दिए, इसके बाद भी आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों और संबंधित ट्रेडर्स के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।  

यह है मामला
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लुधियाना पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने थाना डिवीजन पांच में 1.64 करोड़ रुपये के फर्जी वैट रिफंड का एक मामला रमन गर्ग के खिलाफ दर्ज कराया। गर्ग ने अग्रिम जमानत के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यहीं से इसकी सीबीआई जांच की नींव पड़ गई।                 
विज्ञापन


            
ऐसे होता है फर्जी वैट रिफंड
फर्जी कंपनियां बनाकर जाली दस्तावेजों मसलन फर्म रजिस्ट्रे्शन, माल का बिल, इन्वाइस, ट्रांसपोर्ट बिल और आईसीसी बैरियर की फर्जी पर्चियां आबकारी एवं कराधान विभाग के रिकार्ड में जमा करवाकर कुल माल की कीमत पर वैट रिफंड लिया जाता था। सच्चाई यह है कि न तो कोई फर्म है, न ही कहीं माल भेजा जाता है और न ही कोई बिल होता है लेकिन आबकारी एवं कराधान विभाग से रिफंड ले लिया जाता था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें