एनजीओ सहारा यूथ इंडिया वेलफेयर सोसाइटी ने प्लास्टिक से ईंधन बनाने का न केवल फार्मूला खोज निकाला है बल्कि इसकी एक मशीन भी तैयार कर दी है।
यह काम सहारा यूथ इंडिया के चेयरमैन अजय पलटा, इंजीनियर राहुल सहगल व अजय यादव की टीम ने किया है।
अजय पलटा व उनकी टीम ने सोमवार को इस मशीन के इस्तेमाल के बारे में विस्तार से बताया। सहारा यूथ इंडिया संस्था वाटर हार्वेस्टिंग से लेकर कई सुधार के लिए लगातार स्थानीय प्रशासन पर दबाव बनाती रही है।
चेयरमैन अजय पलटा ने बताया कि सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू तभी किया जा सकता है, अगर इसको प्रैक्टिकल रूपरेखा दी जाए। इसी मकसद से उन्होंने पिछले तीन साल से प्लास्टिक के वेस्टेज पर रिसर्च व इसके इस्तेमाल को लेकर खोज की।
इस दौरान उनका संपर्क थर्मल इंजीनियर राहुल सहगल से हो गया। पलटा ने बताया कि प्लास्टिक को जलाया नहीं जा सकता क्योंकि इससे खतरनाक जहरीली गैस पैदा होती है। बड़ी-बड़ी रिफाइनरी पोलीमर को जोड़कर प्लास्टिक बनाती हैं और इस प्रक्रिया को उल्टा करने की उन्होंने ठान ली थी।
इसके तहत प्लास्टिक को गर्म कर पोलीमर को तोड़कर उसका ईंधन बनाने की योजना थी, जिसके लिए एक मशीन तैयार की गई और पोलीमर को तोड़कर इंधन बना दिया गया।
इस प्रक्रिया को पैरोलिसिस कहा जाता है। इस मशीन का उपयोग कर वेस्ट प्लास्टिक को तेल व गैस के रूप में बदल दिया जाता है।
अजय पलटा ने दावा किया कि गैस का इस्तेमाल वाहन चलाने के लिए भी किया जा सकता है और बिजली का उत्पादन भी इससे किया जा सकता है। पत्रकार वार्ता में अजय पलटा ने दावा किया कि इस मशीन का उपयोग कर जो बिजली तैयार होगी, उसका खर्च एक से लेकर डेढ़ रुपये प्रति यूनिट आएगा।
पेशे से उद्यमी अजय पलटा ने यह भी दावा किया कि अगर मशीन का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होने लगे तो 70 लाख टन प्लास्टिक से 63 लाख टन तक ईंधन बनाया जा सकता है। इससे पांच हजार करोड़ डालर की कीमत का तेल का आयात कम हो जाएगा।
इस मौके पर अजय पलटा ने प्लास्टिक के बनाई गई गैस से चलने वाली कार का भी प्रदर्शन कर सबको चकित कर दिया।