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देश की सेवा का ऐसा फल: साढ़े बारह साल पाकिस्तान की जेल में झेली यातनाएं, अब उसका सिला देने वाला भी कोई नहीं

Wed, 11 Dec 2024 10:35 AM IST
निवेदिता वर्मा अनिल कुमार, संवाद, फिरोजपुर (पंजाब)

सार

फिरोजपुर के सतीश मारवाह देश के लिए जासूसी करने पाकिस्तान गए थे। वहां पाकिस्तान की जेल में उन्हें साढ़े 12 साल बिताने पड़े थे। जेल में उन्हें कई तरह की यातनाएं दी गई थी। चार जुलाई 1986 में वे वापस लाैटे थे। अब उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। 
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जासूस सतीश मरवाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की सेवा करने वाले जासूस सतीश मरवाह (77) बहुत ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में हुए कई टाॅर्चर से अब उनका शरीर बेकार हो चुका है। इसलिए अब वो बिस्तर पर शौच करने को मजबूर हैं। आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। रोते हुए कहते हैं देश के लिए जिंदगी दांव पर लगा दी थी अब ऐसी हालत में सरकार भी उनकी कोई सुध नहीं ले रही। जवानी के साढ़े बारह साल पाकिस्तान की जेल में काटे हैं, उसका फल नहीं मिला।
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राैंगटे खड़े कर देने वाली तकलीफें सही

जासूस सतीश मरवाह देश की सेवा के लिए पाकिस्तान गए थे और वहां पर जासूसी के आरोप में पकड़े गए। साढ़े बारह साल तक पाकिस्तान की विभिन्न जेलों में बंद रहे। पाकिस्तान की हर खुफिया एजेंसी ने उसके साथ टाॅर्चर कर पूछताछ की थी। वहां की जेल में उनके शरीर में बिजली का करंट लगाकर टाॅर्चर किया गया था। 

शरीर में ब्लेड से कट लगाकर ऐसा केमिकल डालते थे कि शरीर सुन्न पड़ जाता था। इसके अलावा कुएं में उल्टा लटकाकर नीचे जहरीले सांप छोड़ देते थे। बर्फ की सिल्लियां पर लिटाकर पीटते थे। पूछताछ के दौरान उनके दांत भी तोड़ दिए थे। उनकी मार से शरीर बेकार हो चुका है। अब उन्हें पैरालिसिस का अटैक पड़ने से चल फिर भी नहीं सकते। शौच भी बिस्तर पर करने को मजबूर हैं। देश के लिए बहुत कुछ किया अब तो कोई सरकार नहीं पूछती। आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है।

होमगार्ड की नाैकरी मिली, अब पेंशन भी नहीं

पाकिस्तान से लौटने के बाद एक अधिकारी ने होमगार्ड में नौकरी दिलवा दी थी, उसके पीछे भी उनका स्वार्थ था लेकिन सेवानिवृत होने के बाद कोई पेंशन नहीं मिलती। 

सतीश बताते हैं कि जब पाकिस्तान से भारत लौटे थे उस समय पाकिस्तान की जेल में कई फौजी व अन्य लोग बंद थे, जिनकी संख्या 170 के करीब होगी। यहां लौट कर केंद्र सरकार के मंत्रियों को सूचित किया था। किसी ने उन्हें छुड़वाने का प्रयास नहीं किया। कई भारतीय लोगों की अस्थियां जेल पड़ी हैं। 
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यातनाएं याद कर आज भी आता है रोना

सतीश पाकिस्तान जेल में बिताए दिन याद करके रोते हैं। साथ में यह भी कहते हैं कि एक पाकिस्तानी अधिकारी ने उनकी मदद भी की थी, उनकी दी प्लेट व चम्मच निशानी के तौर अपने साथ भारत लेकर आए थे। सतीश कहते हैं वह उर्दू बहुत अच्छी बोलते हैं, उनकी बोली से कोई पहचान नहीं सकता है। उर्दू में कलमा भी पढ़ लेते हैं।
 
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