पाकिस्तान ने मंगलवार देर शाम भारत के सात कैदियों को रिहा किया। दोनों देशों में कैदियों के आदान प्रदान के समझौते के तहत पाकिस्तानी सरकार ने इन कैदियों को रिहा किया। ये कैदी अलग-अलग समय में पाकिस्तान में पकड़े गए थे। इन कैदियों ने 3 से सात वर्ष का कारावास भुगता।
पाकिस्तान में मानवाधिकार संगठन अंसार बर्नी ट्रस्ट ने इन कैदियों को जेलों से छुड़वाया है। दो कैदियों लतीफ उल हक और माईली हनीफ को कराची जेल से रिहा किया गया। इन दोनों कैदियों ने पांच-पांच वर्ष की कैद पूरी की है। अन्य पांच कैदियों को कोट लखपतराय जेल लाहौर से रिहा किया।
ये सभी कैदी अपनी सजाएं काफी समय से पूरी कर चुके थे, परंतु पाकिस्तानी जेलों में बंद थे। इन छोड़े गए कैदियों में एक जालंधर और एक बरेली का रहने वाला है।
अंसार बर्नी ट्रस्ट ने इन कैदियों को रिहा करवाने के बाद अपने खर्च पर सीमा पर लाकर भारत भेजा। ये कैदी पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में पकड़े गए थे।
देर शाम भारत पहुंचने पर इन कैदियों को पाकिस्तान में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन अंसार बर्नी ट्रस्ट के भारतीय सहयोगी अखिल भारतीय ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन के सचिव हवा सिंह ने रिसीव किया।
रिहा किए गए कैदियों में त्रिकोल चंद जालंधर और यशपाल बरेली, उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। लतीफ उल हक और मोहम्मद अनीफ गुजरात, राजू बाबू और राम दास बिहार, सीता महाराष्ट्र का निवासी है।
लतीफ हक और मोहम्मद अनीफ ने कहा कि रमजान का शुरू हुआ महीना उनके लिए खुशियां लेकर आया है। कल से रमजान शुरू हो रहा है। 6 वर्ष के बाद वह अपने वतन पहुंच कर रोजे रखेंगे।
इस के लिए वह बार-बार खुदा का धन्यवाद करते हैं। वह हर बार दुआ करते थे कि है खुदा हमें अपने वतन जा कर पूर्ण धार्मिक श्रद्धा के साथ रोजे रखने की बख्शीश करे। खुदा ने हमारी आवाज सुनी है।
जालंधर के त्रिलोक चंद ने कहा कि वह इंग्लैंड में काम करता था। वह वीजा लेकर पाकिस्तान आया और यहां उसे जासूसी के आरोपों में पकड़ लिया गया। वह नौ माह की कैद पूरी करके वतन लौटा है।