लाहौर जेल में 22 साल से बंद भारतीय कैदी सरबजीत सिंह और उनके परिवार की त्रासदी पर पाकिस्तान के वकील की ओर से लिखी किताब ‘सरबजीत सिंह: ए केस आफ मिसटेकेन आईडेंटिटी’ का पाक में विमोचन रोक दिया गया है।
समारोह से पहले लाहौर प्रेस क्लब के गेट बंद कर दिए गए और लांचिंग के लिए पहुंचे पाक सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसीडेंट हामिद खान और मानवाधिकार आयोग के एक सदस्य को भी अंदर नहीं जाने दिया गया।
सरबजीत के संग पाकिस्तानी पुलिस, जांच एजेंसी और अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान किए गए भेदभाव को इंगित करती किताब लिखने वाले लाहौर के वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता ओवैश शेख ने ‘अमर उजाला’ को भेजे मेल में यह जानकारी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित तौर पर आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान की ओर से शुक्रवार को उनके परिवार को धमकी भरा पत्र भेजने के बाद प्रेस क्लब प्रबंधन और लाहौर प्रशासन ने पहले से तय बुक रिलीज समारोह नहीं होने दिया।
शेख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व प्रेसीडेंट, मानवाधिकार आयोग के सदस्य और भारत-पाक पीस इनीशिएटिव से जुड़े तमाम लोग जब क्लब पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। क्लब के अंदर से सुरक्षा बल के जवान तैनात कर दिए गए थे जिसके कारण कार्यक्रम नहीं हो सका।
तालिबान की धमकियों से नहीं डरूंगा: ओवैश
ओवैश ने कहा कि पाक तालिबान की ओर से उनकी पत्नी को कथित तौर पर भेजे खत की जानकारी पुलिस को दे दी जाएगी। उनकी पत्नी को धमकाया गया है कि अगर सरबजीत के मसले पर उनके पति ने प्रेस कांफ्रेंस और रिहाई के लिए मुहिम नहीं रोकी तो उनके परिवार को नुकसान पहुंचेगा। शेख ने कहा कि वह धमकियों से नहीं डरेंगे और भारत और पाक दोनों देशों में बंद कैदियों की रिहाई के लिए प्रयास करते रहेंगे।
शेख को धमकी पर सरबजीत का परिवार चुप
गलत पहचान की वजह से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने ‘अमर उजाला’ से फोन पर बातचीत में कहा कि ओवैश को तालिबान की धमकी के बारे में वह कुछ नहीं बोलना चाहतीं।
उनका परिवार सरबजीत सिंह की रिहाई के अलावा किसी दूसरे मामले में नहीं पड़ना चाहता। वह जल्द ही दिल्ली जाकर गृहमंत्री और केंद्र सरकार के दूसरे नुमाइंदों से मिलकर भाई की रिहाई के लिए पाक सरकार पर दबाव बनाने का आग्रह करेंगी।