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लुधियाना में 11 दिन निकलता है श्री राम का डोला

Tue, 24 Sep 2013 05:33 PM IST
अमर उजाला, लुधियाना
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लुधियाना में रामलीला की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आधुनिकीकरण के दौर में भी लुधियाना मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन की विरासत को संजोए है। पंजाब के इस शहर में लगभग 200 साल से दशहरा के 11 दिन पहले तक रोजाना प्रभु श्री राम का विशेष डोला निकाला जाता है।
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 यह परंपरा गांव सनेत के कहार बिरादरी के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी निभा रहे हैं। इसके अलावा शहर के हर प्रमुख स्थान पर रामलीलाओं का मंचन कर युवा पीढ़ी को अपनी विरासत, परंपराओं से रू-ब-रू कराने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

कहीं अयोध्या से कलाकार पधार रहे हैं तो कहीं वृंदावन से पार्टियां आकर रामकथा का सजीव मंचन करने को आतुर हैं। इस बार रामलीला का मंचन 5 अक्तूबर से शुरू होकर दशहरा वाले दिन 13 अक्तूबर को संपूर्ण होगा। महंगाई के दौर में पिछले साल के मुकाबले रामलीला कमेटियों का खर्च बीस से पच्चीस फीसदी तक अधिक होने की संभावना है। सभी कमेटियां इसे मैनेज करने में जुटी हैं।
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शहर की प्राचीन रामलीला कमेटी दरेसी की ओर से इस बार भी श्रीराम का डोला (सिंहासन) रासलीला के दौरान 11 दिन तक निकाला जाएगा। कमेटी के संरक्षक प्रेम पराशर एवं केवल कृष्ण मरवाहा का कहना है कि पिछले 200 साल से प्रभु राम का डोला निकाला जा रहा है। सनेत के लोग इस डोले को रोजाना ठाकुरद्वारे से पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक लाते हैं।

कंधों पर उठा कर शहर के विभिन्न बाजारों, मोहल्लों से लेकर रामलीला मैदान पहुंचते हैं। जहां पर रासलीला के बाद उनको फिर से ठाकुरद्वारे में सुरक्षित रखा जाता है। इस ढोले में रामकथा के अनुसार प्रभु के स्वरूपों को बदला जाता है। इन स्वरूपों के दर्शनों के लिए महानगरवासी बड़ी श्रद्धा से आरती, पूजा कर अपने जीवन को मंगलमय बनाने की प्रार्थना करते हैं। रामलीला के दौरान सभी शहरवासी प्रभु श्री राम के रंग में रंगने को तैयार हैं।

 इस बार रासलीला के लिए रामलीला कमेटी ने वृंदावन से खास तौर पर कलाकारों को आमंत्रित किया है। कमेटी का दावा है कि डोला निकालने की परंपरा केवल लुधियाना में है। मरवाहा ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले खर्च में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है।

उधर राजगुरु नगर दशहरा कमेटी की ओर से भी पांच अक्तूबर से रामलीला शुरू की जा रही है। इसके लिए अयोध्या से खास तौर पर कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। कमेटी के प्रधान बृजमोहन कालिया का कहना है कि महंगाई के दौर में पिछले साल के मुकाबले खर्च बढ़ गया है। इसे मैनेज करने का प्रयास किया जा रहा है। रामलीला के जरिये बच्चों एवं युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जाता है।
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