सेना द्वारा अंतरराष्ट्रीय रेलमार्ग (भारत-पाकिस्तान के रास्ते बिछा ट्रैक) उखाड़ने के बाद रेलवे ने सेना की गोल्डन ऐरो कैंटीन में खुला रिजर्वेशन सेंटर कथित तौर पर पिछले दो दिन से बंद कर दिया है।
उक्त सेंटर पर किसी सेना अधिकारी और जवान की रिजर्वेशन नहीं हो रही है। यही नहीं रेल अधिकारियों ने मौखिक आदेश जारी कर सेना के अधिकारियों के एचआरओ कोटे से सीट देना भी बंद करवा दिया है।
रेल अधिकारी गैंगमैन और आरपीएफ जवानों को लेकर ट्रैक बिछाने हुसैनीवाला बार्डर गए थे, परंतु सेना ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया। इसी के चलते रेलवे ने सेना को ओबलाइज के तौर पर जो सुविधा देते थे, वे सभी बंद कर दी हैं। सिर्फ सेना के रूटीन के कार्य हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार रेलवे ने सेना की गोल्डन ऐरो कैंटीन में रिजर्वेशन सेंटर खोल कर सेना के अधिकारियों और जवानों को अलग से सुविधा मुहैया करवाई थी। लेकिन जब से सेना के अधिकारियों ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बार्डर पर बिछा अंतरराष्ट्रीय रेलमार्ग उखाड़ा है, उसके बाद सेना के अधिकारियों की मनमानी देखते हुए रेलवे ने पिछले दो दिन से उक्त सुविधा बंद कर दी है। अब सेना के जवानों को छावनी रेलवे स्टेशन स्थित आरक्षण कार्यालय में कतार लगाकर रिजर्वेशन करवानी पड़ रही है। सेना के अधिकारियों की वेटिंग सीट भी कनफर्म नहीं हो पा रही है।
उधर, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जब कभी भारत-पाकिस्तान के बीच हुसैनीवाला बार्डर से व्यापार खुलता है तो ट्रेन कैसे चलाई जाएगी। क्योंकि कोई और रूट नहीं है जहां पर ट्रैक बिछाया जा सके। ये ट्रैक दोनों देशों के बंटवारे से पहले का बिछा है। रेल डिवीजन फिरोजपुर के अधिकारियों ने पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी है।