पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल व बसपा के बीच गठबंधन होने के बाद सवाल भी खड़े होने लगे हैं। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार, अकाली दल ने बसपा को पिंजरे में बंद कर दिया है। एससी वर्ग की पार्टी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी ने आरक्षित सीटों के स्थान पर अकाली दल से 12 सीटें ऐसी ली हैं, जो सामान्य वर्ग से हैं और इन पर बसपा का जनाधार काफी कम है। बाकी आठ सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से पांच पर बसपा भी कमजोर मानी जा रही है। महज तीन सीटों पर ही बसपा विरोधियों को टक्कर देने की स्थिति में है। कुल मिलाकर 17 सीटों पर बसपा का जनाधार काफी कम है।
वहीं हिंदू वोट बैंक माने जाने वाली कंडी क्षेत्र की सीटें बसपा को देकर अकाली दल ने खेल कर दिया है। इन पर अकाली दल का कैडर काफी कम है, क्योंकि 25 साल से इन पर अकाली दल के उम्मीदवार नहीं, बल्कि भाजपा के प्रत्याशी खड़े होते थे। यहां 2017 व 2019 के चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था।
गठबंधन को लेकर बसपा में विरोधी सुर उठने लगे हैं कि पार्टी का केंद्र बिंदु मानी जाने वाली फिल्लौर, आदमपुर विधानसभा सीट क्यों छोड़ दी गई, जहां बसपा की जीत निश्चित थी। पंजाब में 34 आरक्षित सीटें हैं और गठबंधन से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि बसपा को अधिकतर आरक्षित सीटें ही मिलेंगी, लेकिन गठबंधन के बाद सभी कयास धरे रह गए।
बसपा कई आरक्षित सीटें जीतने की क्षमता रखती है, जहां एससी वर्ग के वोट का खासा जनाधार है। इसमें चब्बेवाल, शाम चौरासी, गढ़शंकर, बंगा, फिल्लौर, आदमपुर व बलाचौर प्रमुख हैं। बसपा ने इन सीटों को हासिल करने के लिए अकाली दल से जिद नहीं की और उन सीटों पर हामी भर दी, जिन सीटों पर बसपा काफी कमजोर है। खासकर कंडी क्षेत्र की पठानकोट, दसूहा, टांडा जैसी सीटों पर हिंदू बहुसंख्यक वोट हैं और पार्टी का कैडर काफी कमजोर है।
मोहाली, होशियारपुर सिटी, जालंधर नॉर्थ, जालंधर वेस्ट सीट पर बसपा का प्रदर्शन आज तक अच्छा नहीं रहा है। बसपा ने 20 सीटों में से 8 ही आरक्षित सीटों पर लड़ने का फैसला किया है। अब पार्टी के दिग्गज नेताओं के अनुसार बसपा करतारपुर, फगवाड़ा और नवांशहर सीट पर फाइट कर सकती है, लेकिन बाकी 17 सीटों पर पार्टी काफी कमजोर स्थिति में है। खुद अकाली दल भी चुनाव लड़कर इन सीटों को जीतने की स्थिति में नहीं था। इनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा चुनाव लड़ती रही है। जिसमें सुजानपुर, भोआ, पठानकोट, होशियारपुर सिटी, फगवाड़ा, जालंधर नॉर्थ, जालंधर वेस्ट की सीटें प्रमुख हैं।
सीटों का बंटवारा गलत हुआ है : कोटली
बसपा के टकसाली नेता सुखविंदर कोटली का कहना है कि बसपा-शिअद गठबंधन का तो वर्कर पिछले 25 साल से इंतजार कर रहे थे। समझौता जरूरी था, ताकि पंजाब में बसपा आगे बढ़ सके, लेकिन सीटों का बंटवारा ही गलत हुआ है। अकाली दल के साथ समझौते के बाद बसपा कई सीटों पर स्पष्ट रूप से जीतती दिखाई दे रही थी, लेकिन 17 सीटों पर तो बसपा काफी कमजोर हालत में है। सीटों का बंटवारा वर्करों का मनोबल गिराने वाला है।