भाखड़ा डैम के जलस्तर ने पंजाब के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। पहाड़ों में पिछले 23 सालों में इस बार सर्वाधिक बर्फ पिघलने और बारिश होने से भाखड़ा डैम पूरी तरह लबालब हो गया है।
अभी डैम का जलस्तर 1629.87 फुट पहुंच चुका है, जो दस जुलाई की तारीख में अब तक का सर्वाधिक है। जलस्तर पिछले साल के मुकाबले 84 फीट अधिक है।
बरसात अधिक होने पर कभी भी फ्लड गेट खोले जा सकते हैं और पानी छोड़ा जा सकता है। इससे पंजाब के दस से अधिक जिलों के प्रभावित होने की आशंका है। ऐसी स्थिति में ब्यास के किनारे अतिक्रमण सरकार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन सकता है।
पंजाब सरकार को अलर्ट जारी
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंजाब सरकार को इस संबंध में अलर्ट कर दिया है। यह जानकारी बोर्ड के चेयरमैन एबी अग्रवाल ने दी।
अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन उत्तराखंड में हुई त्रासदी को लेकर इस समय भय का माहौल है। ऐसे में बोर्ड की इस चेतावनी को कम कर के नहीं आंका जाना चाहिए।
इस बाबत बोर्ड के अधिकारियों की पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ बैठक हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने जिलों के उपायुक्तों को भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं।
अग्रवाल ने कहा कि पानी का यह बढ़ा हुआ स्तर बर्फ पिघलने और प्री मानसून की बरसात के कारण हुआ है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर पानी छोड़ने की नौबत आई तो यह पानी एक सुनियोजित ढंग से छोड़ा जाएगा।
अतिक्रमण के कारण कम हो रही क्षमता
अग्रवाल ने बताया कि सतलुज और ब्यास में पिछले कुछ सालों में बढ़े अतिक्रमण ने पानी के बहाव को प्रभावित किया है। सतलुज और ब्यास में तीन लाख क्यूसेक की क्षमता थी। इस समय इनमें 70 से 75 हजार क्सूसेक पानी छोड़ा जाए तो शोर मच जाता है।
अतिक्रमण के कारण इन नदियों की क्षमता कम हो रही है। किसी जमाने में इन नदियों की क्षमता आठ लाख क्यूसेक होती थी।