एंटी टेररिस्ट फ्रंट के प्रधान मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने कांग्रेसी नेताओं को गुरुद्वारों की राजनीति में दखल न करने की सलाह दी है।
बिट्टा ने गत दिनों अकाल तख्त में हुए हादसे की निंदा करते हुए कहा कि अगर यह घटना पूर्व कांग्रेस सरकार के शासनकाल में होती तो पंजाब में पुन: आतंकवाद पैर पसार जाता।
बिट्टा ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में खुफिया एजेंसियां कमजोेर रही हैं तभी पंजाब में माहौल बिगड़ा था। बिट्टा ने सिमरनजीत सिंह मान पर माहौल को बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए अकाल तख्त के जत्थेदार से मान को पंथ से निकालने की मांग की है। बिट्टा ने कहा कि दल खालसा कांग्रेस की देन है।
कांग्रेस के शासनकाल में खुफिया एजेंसियों की कारगुजारी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी को खुफिया तंत्र से सही जानकारी मिली होती तो पंजाब का माहौल कभी खराब नहीं होता। कभी भी दरबार साहिब पर हमला न होता और न ही 1984 के दंगे होते। अब मोदी की सरकार में खुफिया तंत्र कुछ एक्टिव जरूर हुआ है।
उन्होंने कहा कि मान पंजाब का माहौल खराब कर, कनाडा, अमेरिका तथा जर्मनी से फंड की डिमांड करना चाहते हैं। अभी जो अकाल तख्त में हुआ है, उसमें पूरी तरह से मान जिम्मेवार हैं। अकाल तख्त की टास्कफोर्स की भूमिका सही रही है। ऐसे में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जत्थेदार अवतार सिंह मक्कड़ को टास्कफोर्स के खिलाफ कार्रवाई न करते हुए विपरीत टास्कफोर्स को ओर मजबूत करने की तरफ ध्यान देना चाहिए।
पंजाब में आतंकवाद पैदा होने के क्या कारण थे, इसके लिए बिट्टा ने मोदी सरकार को वाइट पेपर रिलीज करने की मांग की है। अवतार सिंह मक्कड़ की तरफ से सिमरजीत सिंह मान को अकाल तख्त में हुई घटना के लिए क्लीन चिट देने को बिट्टा ने गलत फैसला बताया है।
उन्होंने कहा कि अकाल तख्त महज सिखों के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू, मुस्लिम तथा विदेशों की संगत के लिए प्रार्थना का घर है। इस मौके उनके साथ अनिल शर्मा, जसबीर सिंह, जगजीत सिंह तथा सुमित बांसल भी मौजूद थे।