गांव छत स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर
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पंजाब के जीरकपुर के गांव छत में बने शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा साहिब का नाम इतिहास में दर्ज है। कहा जाता है कि इसी गुरुद्वारे में बैठकर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर ने सरहिंद के राजा वजीर खां को मौत के घाट उतारने का एलान किया था।
गांववासियों के अनुसार, आज जिस जगह गुरुद्वारा साहिब मौजूद हैं, वहां पर शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अपने योद्धाओं के साथ कई बैठकों का आयोजन किया था। इन्हीं बैठकों में सरहिंद के मुगल शासक वजीर खां के खिलाफ लड़ाई का एलान किया गया था और बाबा बंदा सिंह बहादुर ने वजीर खां को मौत के घाट उतारने का निश्चय किया।
इस बाबत उन्होंने बकायदा एक चिट्ठी लिखी थी, जिसको मुगल शासक के पास भेजा गया। यह चिट्ठी पढ़ने के बाद वजीर खां आगबबूला हो गया था। इसके बाद दोनों में भीषण युद्ध हुआ। इस युद्ध में वजीर खां को बंदा सिंह बहादुर ने मौत के घाट उतार दिया था।
शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर जिस क्षेत्र में रुकते थे, वहां पर अपने खालसा चिन्ह का झंडा लगा देते थे। गांव छत के अंदर भी खालसा का झंडा लगाया गया था। बंदा सिंह बहादुर के जाने के बाद उस समय के ग्रामीणों ने निशान साहिब को ऐतिहासिक मानते हुए वहां पर गुरुद्वारा साहिब बनाने की नींव रख दी। इसके बाद यहां बड़ा गुरुद्वारा साहिब बनया गया। अब इस गुरुद्वारा को शहीद बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा के नाम से जाना जाता है।